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गोरखपुर, 30 अगस्त (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को रेखांकित करते हुए, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने 35 अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों से स्नेहपूर्ण संवाद किया। इन छात्रों में नेपाल और संयुक्त राज्य अमेरिका से आए शोधार्थी शामिल हैं, जिन्होंने 2024–25 सत्र में पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश लिया है। यह संवाद विश्वविद्यालय की वैश्विक शैक्षणिक एकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता तथा छात्र–अनुकूल, समावेशी वातावरण निर्माण की दिशा में उठाए गए कदमों का सशक्त प्रतीक रहा।
प्रो. टंडन ने छात्रों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य अपनी वैश्विक रैंकिंग को सुदृढ़ करना, बहुसांस्कृतिक वातावरण को प्रोत्साहित करना तथा शिक्षण एवं अनुसंधान में उत्कृष्टता प्राप्त करना है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें प्रमुख बिंदु शामिल हैं:
• उच्च स्तरीय शोध को प्रतिष्ठित क्वार्टाइल-सूचीबद्ध पत्रिकाओं में प्रकाशित करना।
• शोध एवं वित्तीय सहयोग की सुदृढ़ व्यवस्था।
• अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए व्यापक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
नेपाल की पाँच विश्वविद्यालयों के साथ हुए हालिया समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उल्लेख करते हुए प्रो. टंडन ने आश्वस्त किया कि छात्रों की डिग्रियों का अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पारदर्शी समकक्षता की जाएगी। उन्होंने नवस्थापित अंतरराष्ट्रीय छात्रावास में आवास, शोध एवं शिक्षण संसाधनों की रिमोट एक्सेस सुविधा तथा भारतीय बैंक की विश्वविद्यालय शाखा के माध्यम से वित्तीय लेन-देन की सुगमता की भी घोषणा की।
प्रो. टंडन ने आगे सांस्कृतिक आदान–प्रदान कार्यक्रम, शैक्षणिक सहयोग और नेपाल तक साइकिल रैली जैसे अनूठे उपक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा, “दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय अपनी वैश्विक पहचान को सुदृढ़ रूप से स्थापित कर रहा है। हम अपने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वस्तरीय शोध अवसर ही नहीं, बल्कि ऐसा सहयोगी सांस्कृतिक परिवेश भी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहाँ वे स्वयं को अपने घर जैसा अनुभव करें।”
छात्रों ने सहज प्रवेश प्रक्रिया, सहयोगी संकाय एवं स्वागतपूर्ण वातावरण की सराहना करते हुए क्रॉस–कल्चरल गतिविधियों की स्थापना का सुझाव भी दिया। प्रो. टंडन ने उनकी सक्रिय पहल की प्रशंसा करते हुए शीघ्र अमल का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम को अकादमिक दृष्टि से समृद्ध करते हुए अनुसंधान प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. दिनेश यादव ने शोध की उत्कृष्टता, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) तथा पीएचडी दिशा–निर्देशों के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने प्रभावशाली शोध एवं नवाचार को वैश्विक शैक्षणिक विश्वसनीयता का आधार बताया।
अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. रामवंत गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को विश्वविद्यालय की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और उनके शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कल्याण की गारंटी दी।
कार्यक्रम का समापन डॉ. कुसुम के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने छात्रों की उपस्थिति की सराहना की और विश्वविद्यालय की ओर से उनके विकास एवं समन्वय हेतु सतत् प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के सदस्य डॉ. आलोक कुमार चौधरी और डॉ. मनीष प्रताप सिंह भी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय