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- जेएनएस महाविद्यालय में आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान में प्राचीन ज्ञान की भूमिका विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न
भोपाल, 30 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारत की समृद्ध प्राचीन ज्ञान परंपरा, वर्तमान परिदृश्य में भी विश्व कल्याण की आधारशिला है। भारतीय शिक्षा पद्धति, जो प्राचीन काल से ही मानवता को दिशा देती रही है, आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक है।
मंत्री परमार शनिवार को जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शुजालपुर में उच्च शिक्षा विभाग एवं आईक्यूऐसी के संयुक्त तत्वावधान में आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान में प्राचीन ज्ञान की भूमिका विषय पर आयोजित एक दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारत की समृद्ध प्राचीन ज्ञान परंपरा और इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चिकित्सा, दर्शन, शिक्षा और न्याय प्रणाली में भारत ने जो अद्वितीय योगदान दिए, वही स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 के सशक्त भारत के निर्माण की आधारशिला बन रहे हैं। आयुर्वेद, योग और ध्यान की परंपरा ने विश्व को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखाया, तो गणित और खगोल विज्ञान ने आधुनिक विज्ञान की नींव रखी। मंत्री श्री परमार ने कहा कि न्याय व्यवस्था और शिक्षा पद्धति ने समाज को संतुलन और सामंजस्य का स्वरूप दिया।
मंत्री परमार ने कहा कि भारत की जीवन-दृष्टि “वसुधैव कुटुंबकम्” संपूर्ण विश्व एक परिवार है। यही जीवन दृष्टि, सदैव से मानवता के कल्याण का मार्गदर्शन करती रही है। यही नीति आज विश्व शांति और सह अस्तित्व की सबसे बड़ी आवश्यकता के रूप में उभर रही है। उन्होंने कहा कि अमृतकाल की ओर बढ़ते हुए भारत की यही प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर नए भारत की आधारशिला है, जो न केवल देश बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी।
मुख्य वक्ता प्रशांत पौराणिक ने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा विश्व में आकर्षण का केंद्र है। सिंधु घाटी सभ्यता, हड़प्पा की मिट्टी कला, धातुकर्म और लिपि इसके प्रमाण हैं। शून्य का आविष्कार, आर्यभट का पाई (π) मान और सूर्यग्रहण की गणना भारतीय गणित की गौरवशाली धरोहर हैं। यह धरोहर वर्ष 2047 के सशक्त भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में मार्गदर्शक है।
विषय विशेषज्ञ डॉ.अनुपम जैन ने द रूल ऑफ़ ऐंसीइन्ट इंडियन नॉलेज इन मॉडर्न एजुकेशन एंड रिसर्च पर अपने व्याख्यान दिए। द्वितीय विषय विशेषज्ञ के रूप में सहा. प्राध्यापक भौतिकी प्रो. लोकेंद्र सिंह चौहान ने अपने व्याख्यान में भोपाल स्थित राजा भोज के मंदिर की वास्तुकला, शिल्प कला और एस्ट्रो फिजिक्स पर प्रकाश डाला। उन्होंने पृथ्वी के घूर्णन की गति, राजा भोज द्वारा बनाए गए जहाजों की माप और भोज मंदिर भोपाल की विशेषताओं का उल्लेख किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार, विशेष अतिथि आलोक खन्ना अध्यक्ष महाविद्यालय जनभागीदारी समिति शुजालपुर, डॉ. एच. एल. अनिजवाल अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा उज्जैन संभाग, मुख्य वक्ता प्रशांत पौराणिक, गर्ल्स पीजी कॉलेज उज्जैन, विषय विशेषज्ञ डॉ. अनुपम जैन सेवानिवृत प्राध्यापक गणित उच्च शिक्षा विभाग, विषय विशेषज्ञ प्रो. लोकेंद्र सिंह चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिक्स आर.आई. ई.भोपाल एवं विशेष अतिथि के रूप में आईक्यूऐसी कोऑर्डिनेटर डॉ. बी.के. त्यागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.राजेश कुमार शर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया।
मंत्री परमार ने व्याख्यान विभिन्न वक्ताओं के व्याख्यान की सराहना की। वेबीनार में विभिन्न प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन भी किया।महाविद्यालय के समस्त स्टॉफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ.आनंद अजनोदिया द्वारा किया गया तथा संपूर्ण कार्यक्रम का आभार भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. रवि राठौर द्वारा किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर