उमरिया: जर्जर आंगनबाड़ी भवनों में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल
उमरिया, 30 अगस्त (हि.स.)। सरकारी आंकड़े कितने ही दावे क्यों न कर लें मगर जमीनी हकीकत इन आंकड़ों से परे ही होती है, खंडहरों में बच्चों का भविष्य संवारने की यह होड़ उन्हीं के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है, हाल ही में सरकार ने तमाम स्कूलों और आंगनबाड़ी भव
मौत के साये मे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल


उमरिया, 30 अगस्त (हि.स.)। सरकारी आंकड़े कितने ही दावे क्यों न कर लें मगर जमीनी हकीकत इन आंकड़ों से परे ही होती है, खंडहरों में बच्चों का भविष्य संवारने की यह होड़ उन्हीं के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है, हाल ही में सरकार ने तमाम स्कूलों और आंगनबाड़ी भवनों के जर्जर स्थिति को लेकर निर्देश दिए हैं कि किसी भी हालत में ऐसे भवनों पर बच्चों को न बैठाया जाये मगर अधिकारियों की उदासीनता के कारण छत से पानी टपक रहा है, छत का प्लास्टर हर रोज गिरता है मगर वह भवन नहीं छूट रहा और न ही बच्चों के लिए नया भवन भी तैयार हैं, जिसके कारण बच्चे अपनी जान जोखिम में डाल शुरुआती शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।

मामला है उमरिया जिले के मानपुर नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 15 हंचौरा का है जहां आंगनवाड़ी का भवन 30 साल पुराना है और वह बरसात के समय में पानी से बचाता कम भिगाता अधिक है, बच्चों के सिर पर मौत का साया हमेशा मंडराता रहता है। जिसके कारण अब वहां के ग्रामीणों ने जर्जर भवन की हालत देखकर पने बच्चों को भेजने को तैयार नहीं है।

वही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता निशा शर्मा ने बताया कि भवन के जर्जर होने की लिखित शिकायत और जानकारी अपने विभाग और अधिकारी को देने के बाद भी वहां नया भवन नहीं बनाया जा सका है, जिसके कारण बच्चे हर रोज मौत के साथ पढ़ाई का सफर तय कर रहे हैं, हालांकि अधिकांश आंगनवाड़ी की हालत जर्जर है जिनमें बच्चों की जान जोखिम में डालकर बैठाया जाता है।

इतना ही नहीं मानपुर के परियोजना अधिकारी राज नारायण ने तो विभाग को यहां तक रिपोर्ट दे दी कि हमारे ब्लाक में कोई भी भवन जर्ज़र हालत में नहीं है। वहीं जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी दिव्या गुप्ता सफाई देते हुए बताया कि हमारे यहां महीनों से लगातार सबको निर्देशित किया जा रहा है कि जहां भी जर्जर आंगनबाड़ी भवन है उनको शिफ्ट कर निजी भवनों में, सरकारी भवनों में कहीं भी लगाया जाए ऐसी कोई भी रिस्क न ली जाए यदि ऐसी स्थिति है तो निश्चित रूप से हम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और सीडीओ सभी पर कार्यवाही करेंगे।

गौरतलब है कि परियोजना अधिकारी और जिला महिला बाल विकास अधिकारी लगातार अपनी फर्जी टूर डायरी बनाकर चारों तरफ भ्रमण दिखाने का काम करते हैं। मगर जमीनी हकीकत यह है कि यह अपने कार्यालयों से कहीं भी बाहर जाने का नाम नहीं लेते हैं जिसके चलते इनको खुद को जानकारी नहीं है कि जिले में कितने आंगनबाड़ी भवन जर्जर स्थिति में है। केवल कार्यालय में बैठकर सफाई देने का काम और छोटे कर्मचारियों पर कार्यवाही करने का काम करते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी