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पूर्वी चंपारण,30 अगस्त (हि.स.)।
जिले के रक्सौल से सटे वीरगंज शहर में डायरिया व कालरा के मरीजों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है।
रक्सौल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल टीम ने सीमावर्ती पंचायतों में जनजागरूकता अभियान तेज कर दिया है। टीम पंटोका, सिसवा, भेलाही, नोनियाडीह सहित कई गांवों में जाकर लोगों को डायरिया से बचाव के उपाय बता रही है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने घर-घर जाकर काउंसिलिंग की और लोगों से साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने, दूषित पानी के सेवन से बचने तथा बच्चों को उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिलाने की अपील की। खासकर पंटोका गांव में डायरिया से प्रभावित परिवारों के बीच ‘माता बैठक’ का आयोजन किया गया।
बैठक में महिलाओं को समझाया गया कि बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाना, हाथ धोने की आदत डालना और खुले में शौच से परहेज करना कितना जरूरी है। बताया गया कि समय पर इलाज और सतर्कता से इस बीमारी से बचा जा सकता है।
उल्लेखनीय है,कि रक्सौल के पंटोका गांव में एक ही परिवार के दो बच्चे डायरिया से ग्रसित पाए गए हैं। दोनों का इलाज स्थानीय डंकन अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों ने लोगों से आग्रह किया है कि डायरिया के लक्षण दिखते ही मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाएं, ताकि समय रहते इलाज हो सके। इधर, रक्सौल नगर परिषद क्षेत्र के अहिरवा टोला वार्ड संख्या 7 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 144 और 146 पर चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। चौपाल में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों को डायरिया-कालरा के खतरे, बचाव और उपचार की जानकारी दी।
अधिकारियों का कहना है कि लगातार जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित रखने का प्रयास जारी है। इसके साथ ही नेपाल से सटे सभी पंचायतों में साफ-सफाई, पीने के पानी की शुद्धता और नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आनंद कुमार