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नई दिल्ली, 30 अगस्त (हि.स.)। भारत को उन्नत प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से क्वांटम प्रौद्योगिकियों में एम.टेक कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत की गई है।
इस नये शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन और क्वांटम सेंसिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में उच्च स्तरीय कौशल उपलब्ध कराना है। इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इसमें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुप्रयुक्त अनुसंधान और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों पर समाधान विकसित करने की क्षमता भी शामिल हो।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के प्रो. एके सूद, डीएसटी के सचिव डॉ. अभय करंदीकर, एचसीएल टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक डॉ. अजय चौधरी, एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टीजी सीताराम, एआईसीटीई की सदस्य सचिव प्रो. श्यामा रथ समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. सीताराम ने कहा कि यह कार्यक्रम कंप्यूटिंग, कम्यूनिकेशन और सेंसिंग के क्षेत्र में क्वांटम तकनीक को नई दिशा देगा। उन्होंने जोर दिया कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य एक सक्षम कार्यबल तैयार करना है जो राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के लक्ष्यों को पूरा करने के साथ-साथ नवाचार को भी बढ़ावा दे सके।
प्रो. सूद ने कहा कि यह पाठ्यक्रम छात्रों के लिए क्वांटम तकनीक को एक व्यवहार्य करियर विकल्प बनाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने इसे समावेशी और उत्कृष्ट शैक्षणिक पहल बताते हुए कहा कि इसका मॉड्यूलर और अनुकूलनीय स्वरूप विविध संस्थानों के लिए उपयुक्त है।
एआईसीटीई और डीएसटी ने देशभर के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों से इस कार्यक्रम को अपनाने और लागू करने का आह्वान किया है ताकि भारत के क्वांटम भविष्य के लिए उच्च प्रशिक्षित पेशेवरों की एक मज़बूत पाइपलाइन तैयार की जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार