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वॉशिंगटन/नैरोबी, 29 अगस्त (हि.स.)। रवांडा ने इस महीने की शुरुआत में अमेरिका से निर्वासित सात प्रवासियों को स्वीकार किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब हाल ही में दोनों देशों के बीच 250 प्रवासियों तक के ट्रांसफर के लिए समझौता हुआ था।
रवांडा सरकार की प्रवक्ता योलांडे माकोलो ने गुरुवार को जारी बयान में कहा, “पहला समूह, जिसमें सात सत्यापित प्रवासी शामिल थे, अगस्त के मध्य में रवांडा पहुंचे। इनमें से तीन ने अपने मूल देश लौटने की इच्छा जताई है, जबकि चार लोग यहीं रहकर नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं। उनकी जरूरतों के अनुसार सभी को आवश्यक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाएगी।”
माकोलो ने बताया कि इन प्रवासियों को वर्कफोर्स ट्रेनिंग, स्वास्थ्य सेवाएं और आवास की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रवासियों के साथ एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के प्रतिनिधि मौजूद थे और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) और रवांडा की सामाजिक सेवाओं द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है।
दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से सख्त इमिग्रेशन नीति अपना रहे हैं। उनका लक्ष्य अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लाखों प्रवासियों को देश से बाहर करना है। प्रशासन का कहना है कि थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन ऐसे प्रवासियों को तेजी से हटाने में मदद करता है, जिनमें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, मानवाधिकार समूहों ने इस नीति की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कदम खतरनाक और अमानवीय है क्योंकि प्रवासियों को ऐसे देशों में भेजा जा सकता है जहां वे हिंसा, असुरक्षा, भाषा और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय