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- किसानों को एमएसपी, खाद और मुआवजा देने में सरकार नाकाम
- अपराध और खिलाड़ियों को लेकर सरकार ने सदन को किया गुमराह
चंडीगढ़, 28 अगस्त (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि पूरे विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी सरकार विपक्ष के सवालों से भागती नजर आई। सरकार ने एक भी सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब नहीं दिया। कानून व्यवस्था से लेकर किसानों, सड़कों, अस्पतालों, महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जल भराव व फसल को भारी नुकसान, आयुष्मान योजना व स्वास्थ्य सेवाएं बदहाली, राइस सेलर को हो रही परेशानी व धान में बिमारी व अन्य शिक्षा संस्थान समेत तमाम मुद्दों पर कांग्रेस विधायकों ने सवाल पूछे। लेकिन सरकार के पास ना तो किसी सवाल का जवाब था और ना ही किसी समस्या का समाधान। मुख्यमंत्री और मंत्री भाजपा के 11 साल की बात न करके मंत्री इधर उधर की बात कर सदन को गुमराह करते रहे।
गुरुवार को चंडीगढ़ में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यंमत्री ने कहा कि बार-बार बीजेपी के उस दावे की भी पोल खुल रही है, जिसमें वो 24 फसलों पर एमएसपी देने की बात करती है। मंडियों में किसान की धान के बाद मक्का और सूरजमुखी एमएसपी से बेहद कम रेट में पिटी। किसानों को 2400 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की बजाय मक्का का सिर्फ 1000 से 1400 रुपये ही रेट मिला। जब भी किसान एमएसपी मांगते हैं तो सरकार उन्हें पोर्टल के जाल में उलझाकर रख देती है। अब खाद के लिए भी ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ के पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया। यानी सरकार एमएसपी और खाद देने की जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ चुकी है। यही हाल मुआवजे का है। सरकार द्वारा ‘क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण तो करवा लिया जाता है। लेकिन मुआवजा नहीं दिया जाता। पीएम फसल बीमा योजना ने भी किसानों को कंगाल और बीमा कंपनियों को मालामाल बना दिया है। ये खुलासा संसद में पूछे गए सवाल के जवाब से हुआ। सरकार ने खुद बताया कि योजना के तहत मुआवजे की रकम में सीधे 90 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा