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जगदलपुर, 13 सितंबर (हि.स.)। इस बार 14 सितंबर शहर के लिए आस्था के दो बड़े पर्वों का संगम लेकर आ रहा है। एक ही दिन सुबह सुहागिनें और युवतियां हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करेंगी, तो इसके बाद घरों और सार्वजनिक पंडालों में विघ्नहर्ता गणेश विराजेंगे। सुबह तीज पूजन और फिर गणपति स्थापना के साथ शहर में लगातार दस दिनों तक धार्मिक उत्सव का माहौल रहेगा। गणेशोत्सव का 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा।
हरितालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। जगदलपुर में तीज पूजन का प्रातःकालीन मुहूर्त करीब सुबह 6.05 से 7.06 बजे तक बताया गया है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी आस्था के चलते सुहागिनें पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं। तीज पूजा के बाद इसी दिन गणेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथि में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना होगी। गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष शुभ माना जाता है। घरों के साथ शहर और जिले के अलग-अलग हिस्सों में सार्वजनिक पंडाल सजाए जा रहे हैं। गणेशजी को दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर, अक्षत, फल और मोदक अर्पित कर पूजा की जाएगी।
गणेश चतुर्थी को लेकर शहर के साथ जिले के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष 250 से अधिक स्थानों पर सार्वजनिक गणेश प्रतिमाएं विराजित होने की बात सामने आई है। गणेश समितियां पंडाल सजाने में जुटी हैं। दस दिनों के दौरान आरती, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य धार्मिक आयोजन होंगे। कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार पहले ही प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे, जबकि प्रमुख विसर्जन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे