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जोधपुर, 12 सितम्बर (हि.स.)। राज्य उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी है कि परिवादी की आपत्ति नहीं होने पर भी 45 दिन बाद पेश जवाब को अभिलेख पर लिया हुआ नहीं माना जा सकता है। न्यायिक सदस्य मुकेश और सदस्य रामनिवास सारस्वत ने कहा कि बजाज एलियांज लाइफ़ इंश्योरेंस कंपनी यह साबित करने में नाकाम रही कि बीमा पॉलिसी लेने से पहले बीमाधारी ने सांस की बीमारी का कोई इलाज लिया हो। बीमा कंपनी को 50 हजार रुपए हर्जाना, दावा राशि 14 लाख 49 हजार 275 रूपए मय 9 फीसदी ब्याज 16 जनवरी 2019 से और पांच हजार रुपए वाद व्यय अदा करना होगा।
बीमा कंपनी ने जिला आयोग,बाड़मेर के परिवाद मंजूर करने के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर कहा कि परिवादी के पति ने 22 जनवरी 2018 को जीवन बीमा पॉलिसी कराई और सांस की बीमारी की वजह से 21 फरवरी को ही मृत्यु हो गई सो दावा संशय से परे नहीं है। परिवादी रिंकू की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता अनिल भंडारी ने कहा कि बीमा कंपनी ने परिवाद का जवाब ही 45 दिन बाद दिया है,सो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत परिवादी की आपत्ति नहीं होने पर भी इसे देखा और पढ़ा नहीं जा सकता है।उन्होंने कहा कि एक माह में मृत्यु होना इत्तेफाक है और इससे यह अवधारणा नहीं ली जा सकती कि बीमाधारी को पॉलिसी के पहले से ही बीमारी हो।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए व्यवस्था दी कि मरीज ने चिकित्सक को बीमारी की जानकारी दी भी है तो वह तभी साबित मानी जाएगी,जब वास्तविक रूप से इलाज का कोई कागज पेश हो और ऐसा साबित करने में बीमा कंपनी अक्षम रही। उन्होंने कहा कि परिवादी के आक्षेप नहीं होने पर भी 45 दिन बाद पेश जवाब को अभिलेख पर लिया हुआ नहीं माना जा सकता है। उन्होंने जिला आयोग,बाड़मेर द्वारा 11 जुलाई 2023 के आदेश को विधिवत मानते हुए पुष्ट कर दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश