Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

जगदलपुर, 11 सितंबर (हि.स.)। बस्तर जिला मुख्यालय में विभिन्न आयोजनों, जुलूस और धार्मिक यात्राओं के दौरान डीजे की तेज आवाज लगातार लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित नियमों और उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद कई आयोजनों में इनका पालन होता नजर नहीं आ रहा है।
शहर के लोगों के अनुसार सत्तारूढ़ दलाें से संबधित संगठनाें द्वारा आयाेजित विभिन्न इलाकों में आयोजन, जुलूस और यात्राओं के दौरान निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजाए जाने के बावजूद इन पर काेई कार्रवाई नहीं की गई। इससे आस-पास रहने वाले लोगों, बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आने वाले दिनों में गणेश उत्सव से लेकर दशहरा तक शहर में सार्वजनिक पंडालों और धार्मिक आयोजनों की संख्या बढ़ने के साथ डीजे के शोर की समस्या और गंभीर होने की आशंका है।
ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन करना आयोजकों की जिम्मेदारी है। उच्च न्यायालय ने भी निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि में लाउडस्पीकर अथवा डीजे बजाए जाने पर प्रशासन को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए प्रशासन के सामने नियमों का पालन कराने की बड़ी चुनौती है। गणेश उत्सव के साथ ही शहर में सार्वजनिक पंडालों में कार्यक्रम शुरू होंगे। इसके बाद नवरात्रि और दशहरा तक लगातार धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन होंगे। ऐसे में डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर आयोजकों में होड़ लगने की आशंका है। यदि समय रहते ध्वनि सीमा, समय और अन्य निर्धारित नियमों को लेकर प्रभावी निगरानी नहीं की गई तो शहरवासियों को आने वाले दिनों में तेज डीजे के शोर से और अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे