गैंगस्टर एक्ट के दाेषी काे तीन साल की सजा
विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने बताया कि थाना कोतवाली नगर में तत्कालीन वादी विवेकानंद तिवारी द्वारा वर्ष 2014 में धारा 2/3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह के व
फाइल फोटो


बांदा, 11 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में करीब 16 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में न्यायालय ने अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह पुत्र स्व. सुरेन्द्र प्रताप सिंह, निवासी काशीराम कॉलोनी, थाना कोतवाली नगर, जनपद बांदा को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास एवं 6,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट), बांदा श्रीपाल सिंह ने यह फैसला 11 सितंबर 2026 को सुनाया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। निर्णय के बाद अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर सजा भुगतने हेतु जिला कारागार, बांदा भेज दिया गया।

विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने बताया कि थाना कोतवाली नगर में तत्कालीन वादी विवेकानंद तिवारी द्वारा वर्ष 2014 में धारा 2/3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया गया था।

अभियोजन के अनुसार अभियुक्त एक संगठित आपराधिक गिरोह से जुड़ा था। गिरोह के सदस्य संगठित रूप से अपराध कर आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करने के अभ्यस्त थे तथा आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र में भय एवं आतंक का वातावरण उत्पन्न करते थे। गिरोह की गतिविधियों के कारण आमजन में भय का माहौल बना रहता था और लोग इनके विरुद्ध शिकायत करने एवं गवाही देने से भी कतराते थे।

अभियुक्त के आपराधिक इतिहास एवं आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंग चार्ट तैयार किया गया, जिसे सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित कराया गया। आवश्यक अभियोजन स्वीकृति प्राप्त होने के बाद गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

मामले की विवेचना उप निरीक्षक कमलेश सिंह यादव द्वारा संपादित की गई। विवेचना के दौरान अभियुक्त के आपराधिक इतिहास, गैंग चार्ट, एफआईआर, जीडी कायमीनामा, आधारभूत मुकदमों से संबंधित अभिलेख एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्य संकलित किए गए। विवेचना पूर्ण होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया।

मामले में न्यायालय द्वारा 17 अगस्त 2015 को अभियुक्त के विरुद्ध आरोप निर्धारित किए गए। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल छह मौखिक गवाहों का परीक्षण कराया गया तथा गैंग चार्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, जीडी कायमीनामा, आरोपपत्र एवं अभियोजन स्वीकृति सहित महत्वपूर्ण अभिलेखीय साक्ष्यों को न्यायालय में सिद्ध कराया गया।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया। अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि उपलब्ध साक्ष्यों से अभियुक्त की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता तथा गैंग से उसका संबंध प्रमाणित होता है और उसके विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के आवश्यक तत्व सिद्ध होते हैं।

मुकदमे की प्रभावी पैरवी में पैरोकार अभिलाष यादव, कोर्ट मोहर्रिर रघुनाथ एवं अमित का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। अभियोजन विभाग से समन्वय स्थापित कर साक्षियों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित कराई गई तथा आवश्यक अभिलेख एवं साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराए गए।

अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के समग्र परीक्षण के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट), बांदा श्रीपाल सिंह ने अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह को धारा 3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत दोषी करार दिया।

न्यायालय ने अभियुक्त को तीन वर्ष के कठोर कारावास एवं 6,000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। निर्णय एवं सजा सुनाए जाने के बाद अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार, बांदा भेज दिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह