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पॉक्सो मामलों की जांच करने वाले अफसरों को ट्रेनिंग देने के लिए डीजीपी को दिए आदेश
जोधपुर, 05 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में एक आरोपित को जमानत देते हुए पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पीडि़ता की उम्र निर्धारित करने में कानूनी प्रावधानों की अनदेखी पर नाराजगी व्यक्त की है। वहीं कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पॉक्सो व किशोरों से जुड़े मामलों की जांच करने वाले अधिकारियों को व्यापक प्रशिक्षण देने पर विचार करने का निर्देश दिया।
आरोपी के खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म सहित भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। उसे 10 नवंबर 2023 को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसके खिलाफ चालान भी पेश किया जा चुका है। आरोपी की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि जांच पूरी हो चुकी है और वह लंबे समय से जेल में है।
बचाव पक्ष ने पीडि़ता की उम्र को लेकर भी सवाल उठाए, क्योंकि पुलिस ने कोई जन्म प्रमाण पत्र पेश नहीं किया था। जन आधार कार्ड में पीडि़ता की उम्र 18 वर्ष दर्ज थी, जबकि मेडिकल जांच में उसकी उम्र 15 से 18 वर्ष के बीच होने का अनुमान लगाया गया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि पीडि़ता की उम्र को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और इसका अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। आरोपी के लंबे समय से जेल में होने और मुकदमे में समय लगने की संभावना को देखते हुए कोर्ट ने उसे 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के तहत उम्र निर्धारण की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। इसके अनुसार, जन्म या स्कूल संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर ही मेडिकल परीक्षण का सहारा लिया जा सकता है। इस मामले में मेडिकल बोर्ड के बजाय केवल मेडिकल ऑफिसर की राय से उम्र निर्धारित किए जाने को कोर्ट ने कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना। अदालत ने अपने आदेश की प्रति डीजीपी को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश