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यमुनानगर, 05 अगस्त (हि.स.)। सावन माह की कांवड़ यात्रा के दौरान हरियाणा के यमुनानगर के कलानौर नाके पर आस्था, सेवा और पारिवारिक समर्पण का अनूठा दृश्य देखने को मिला। पंजाब निवासी दो युवकों ने अपनी 102 वर्षीय दादी सुनहरी देवी को विशेष रूप से तैयार पालकी में बैठाकर हरिद्वार के दर्शन कराए। अब दोनों हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए पालकी को कंधों पर उठाकर अपने घर लौट रहे हैं।
इस यात्रा में सुनहरी देवी के पोते सिमरन और 17 वर्षीय दोहते विराट साथ चल रहे हैं। कलानौर नाके पर जैसे ही श्रद्धालुओं और राहगीरों की नजर पालकी पर पड़ी, बड़ी संख्या में लोग रुक गए। लोगों ने दोनों युवकों के सेवा भाव की सराहना की और सुनहरी देवी का आशीर्वाद लिया।
102 वर्षीय सुनहरी देवी ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें इस तरह हरिद्वार की तीर्थ यात्रा का सौभाग्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पोते और दोहते पर गर्व है और ईश्वर हर परिवार को ऐसे संस्कारी और सेवा-भाव रखने वाले बच्चे दे।
पोते सिमरन ने बताया कि उनके पिता की लंबे समय से इच्छा थी कि पौराणिक कथा के श्रवण कुमार की तरह परिवार की बुजुर्ग मां को पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले जाया जाए। उसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने यह यात्रा शुरू की। हरिद्वार में गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के बाद अब वे गंगाजल लेकर पटियाला लौट रहे हैं।
दोहते विराट ने बताया कि वह संगरूर का निवासी है। परिवार की इस सेवा यात्रा में शामिल होना उसने अपना सौभाग्य माना।
यात्रा के लिए विशेष रूप से मजबूत और आरामदायक पालकी तैयार कराई गई, ताकि बुजुर्ग महिला को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पूरे मार्ग में श्रद्धालु इस अनोखी कांवड़ यात्रा का स्वागत कर रहे हैं। यमुनानगर में भी यह दृश्य श्रद्धा, पारिवारिक संस्कार और सेवा-भाव का प्रेरक उदाहरण बनकर लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार