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हैदराबाद, 29 अगस्त (हि.स.)। तेलंगाना पॉलिटेक्निक संयुक्त कार्रवाई समिति (टीपीजेएसी) ने पॉलिटेक्निक कॉलेजों के यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी (वाईआईएसयू) में प्रस्तावित विलय का विरोध किया है और सरकारी आदेश को वापस लेने की मांग की है।
टीपीजेएसी ने शनिवार को हैदराबाद में राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति से मुलाकात की। इस दौरान संगठन ने 'शक्ति' विभाग के तहत पॉलिटेक्निक कॉलेजों के यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी में विलय का विरोध किया। समिति ने संकल्प लिया कि जब तक सरकार आदेश वापस नहीं लेती, तब तक उनका शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।
सरकार के सलाहकार (सार्वजनिक मामले) के. केशाव राव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति के साथ हुई बैठक के दौरान टीपीजेएसी के अध्यक्ष एम. नागराजू, संयोजक वी. सुरेश और महासचिव बी. श्रवण कुमार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें उन्होंने बताया कि तकनीकी शिक्षा विभाग, राज्य तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एसबीटीईटी) और पॉलिटेक्निक कॉलेजों का सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत स्थापित वाईआईएसयू में विलय क्यों नहीं किया जाना चाहिए।
समिति के पदाधिकारियों ने मांग की कि सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज मौजूदा शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे के भीतर तकनीकी शिक्षा विभाग के तहत ही काम करते रहें। उन्होंने यह भी मांग की कि पॉलिटेक्निक के शैक्षणिक मामलों, परीक्षाओं और डिप्लोमा प्रमाणपत्र जारी करने में एसबीटीईटी की मौजूदा भूमिका बनी रहे। उन्होंने उल्लेख किया कि एसबीटीईटी को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के ढांचे के अनुसार शिक्षा कानून के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया था।
अध्यक्ष एम नागराजू ने कहा कि शैक्षणिक गुणवत्ता, निरंतरता, उचित नियमन और छात्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए पॉलिटेक्निक कॉलेजों को शिक्षा विभाग के तहत ही कार्य करना जारी रखना चाहिए।
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, केशव राव ने प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया है कि पॉलिटेक्निक स्टॉफ से परामर्श किए बिना कोई आगे का निर्णय नहीं लिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj