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नई दिल्ली, 08 जुलाई (हि.स.)। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (एसआईसी) ने खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह पहल युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा है।
इस समझौते के तहत दोनों संस्थान खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा, चोटों की रोकथाम, पुनर्वास, अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे। इसका उद्देश्य दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता, आधुनिक बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक संसाधनों का उपयोग करते हुए भारतीय खिलाड़ियों तथा सहयोगी स्टाफ को समग्र और वैज्ञानिक सहायता प्रदान करना है।
एमओयू पर हस्ताक्षर खेल मंत्रालय के सचिव हरी रंजन राव और स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव की उपस्थिति में हुए। साई की ओर से खेल विज्ञान प्रभाग के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ) बिभु कल्याण नायक तथा सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर की ओर से निदेशक डॉ. दीपक जोशी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर हरी रंजन राव ने कहा कि उच्च प्रदर्शन वाले खेलों का भविष्य खेल विज्ञान और खेल चिकित्सा के प्रभावी समन्वय पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी खिलाड़ियों की निगरानी, चोटों से उबरने, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देकर भारत में विश्वस्तरीय खेल सहायता तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि आधुनिक खेलों में खेल चिकित्सा और खेल विज्ञान खिलाड़ियों के स्वास्थ्य तथा प्रदर्शन के लिए अनिवार्य हो चुके हैं। यह साझेदारी चोटों की रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में मजबूत व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
ब्रिगेडियर (डॉ) बिभु कल्याण नायक ने बताया कि इस सहयोग से बहु-विषयक अनुसंधान, मानकीकृत खेल विज्ञान एवं चिकित्सा प्रोटोकॉल, ज्ञान के आदान-प्रदान और उन्नत खिलाड़ी सहायता सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, डॉ. दीपक जोशी ने कहा कि यह समझौता खेल चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और पुनर्वास सेवाओं को नई मजबूती प्रदान करेगा।
यह पहल केंद्र सरकार की खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) और विकसित भारत @2047 की परिकल्पना के अनुरूप है। इससे भारत की उच्च प्रदर्शन खेल प्रणाली को मजबूत करने और भविष्य के ओलंपिक, पैरालंपिक सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों की वैज्ञानिक तैयारी को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय