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शिमला, 07 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश के विभिन्न विभागों, निगमों और बोर्डों में आउटसोर्स आधार पर भर्ती किए गए कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार से मांगा है। अदालत ने कहा है कि सरकार शपथ पत्र के माध्यम से यह बताए कि पूरे प्रदेश में कितने कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं। साथ ही कोर्ट ने हाल ही में चयनित असिस्टेंट स्टाफ नर्सों को फिलहाल तैनाती देने की राज्य सरकार की मांग भी स्वीकार नहीं की।
न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में बड़ी संख्या में स्टाफ नर्सों के पद खाली हैं। इसी आधार पर सरकार ने हाल ही में परिणाम घोषित होने वाली असिस्टेंट स्टाफ नर्सों को नियुक्ति देने की अनुमति मांगी। हालांकि अदालत ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया और फिलहाल तैनाती की अनुमति नहीं दी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में एक शपथ पत्र पेश किया गया था, लेकिन उसमें प्रदेश के सभी विभागों, निगमों और बोर्डों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं था। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को नया और विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें सभी संबंधित संस्थानों में आउटसोर्स के माध्यम से की गई नियुक्तियों की पूरी जानकारी दी जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आउटसोर्स पदों पर भर्ती को लेकर फिलहाल कोई नया स्थगन आदेश पारित नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय के पहले से लागू आदेश प्रभावी हैं और उसी स्थिति में मामला आगे बढ़ेगा।
पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया था कि स्वास्थ्य विभाग में पहले कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्स आधार पर की जाती है और बाद में उन्हें रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) में समाहित कर दिया जाता है। याचिका में यह भी कहा गया था कि इस व्यवस्था के माध्यम से आउटसोर्स भर्तियों का एक ऐसा रास्ता बनाया गया है, जिसका इस्तेमाल अज्ञात उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने पहले अदालत को बताया था कि उसके पास यह पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है कि प्रदेश सरकार, उसके विभागों, बोर्डों और निगमों में कुल कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। इस पर हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव और वित्त सचिव को स्पष्टीकरण देने के लिए अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा