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जयपुर, 09 जून (हि.स.)। जिला उपभोक्ता आयोग, जयपुर-प्रथम ने बीमा पॉलिसी की प्रीमियम राशि लेने के बाद भी क्लेम दावों का निस्तारण नहीं करने को गंभीर लापरवाही व सेवादोष करार दिया है। वहीं आयोग ने इस लापरवाही पर एचडीएफसी लाइफ स्टैंडर्ड इंश्योरेंस कंपनी पर दस लाख रुपए और दी जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक पर एक लाख रुपए हर्जाना लगाते हुए यह राशि राज्य उपभोक्ता आयोग के राजकोष में जमा करवाने का निर्देश दिया है। साथ ही विपक्षी बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह परिवादिया को क्लेम राशि 4.50 लाख रुपए परिवाद दायर करने की तारीख से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित 45 दिन में दे और मानसिक परेशानी व परिवाद खर्च के लिए 60 हजार रुपए हर्जाना उसे अलग से दे। आयोग के अध्यक्ष डॉ. सूबेसिंह यादव, सदस्या हेमलता अग्रवाल व आशुतोष ने यह आदेश प्रेमदेवी के परिवाद पर दिया। आयोग ने बीमा कंपनी के खिलाफ आईआरडीए को भी शिकायती पत्र लिखकर उससे कार्रवाई रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
मामले के अनुसार, परिवादिया के पति जगदीश नारायण शर्मा ने दी जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से कृषि ऋण लिया था। उसके पेटे बैंक व बीमा कंपनी का अनुबंध होने के चलते उनसे 13 सितंबर 2018 को जोखिम क्षतिपूर्ति का बीमा करवाया था। इस दौरान ही 14 अक्टूबर 2018 को उसके पति की प्राकृतिक मृत्यु हो गई। परिवादिया ने बीमा कंपनी व बैंक के समक्ष जोखिम क्षतिपूर्ति राशि दिलवाने का क्लेम किया, लेकिन बीमा कंपनी व बैंक ने उसके क्लेम का निस्तारण नहीं किया। इसे परिवादिया ने उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक