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मीरजापुर, 06 मई (हि.स.)। जिगना क्षेत्र के परमानपुर में गंगा तट पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
कथा व्यास पं. विष्णुधर द्विवेदी ने ध्रुव चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए भक्ति और संस्कारों का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि जब मन में सुनीति और सद्गुण होते हैं, तभी ध्रुव जैसे आदर्श पुत्र का जन्म होता है। भरत चरित्र के माध्यम से उन्होंने समझाया कि मन ही बंधन और मोक्ष दोनों का कारण है।
अजामिल प्रसंग सुनाते हुए व्यास जी ने कहा कि अंतिम समय में भी भगवान का नाम लेने से उद्धार संभव है। “भगवान के नाम का प्रभाव इतना महान है कि अजामिल को भी परम गति प्राप्त हुई।
भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए बताया कि नारद मुनि के उपदेशों को उन्होंने गर्भ में ही आत्मसात कर लिया था। हिरण्यकश्यप द्वारा किए गए अत्याचार और खंभे से प्रकट हुए भगवान नरसिंह के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा के दौरान व्यास जी ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि एक पौधा लगाने से हजारों जीवों का आशीर्वाद मिलता है।भजन-कीर्तन की मधुर धुनों के बीच श्रोता भक्त भक्ति रस में डूबे रहे।
इस अवसर पर रामनिवास पांडेय, जय देवी, कमलेश पांडेय, इंद्र कुमार, अवधेश कुमार, सुरेश, सुशांत, सुधीर, सुनील, सुजीत, दिव्यांश, निधि, लाल साहब मिश्र, महेंद्र देव, आशीष मिश्र, राधे मिश्रा, पीयूष गोयल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा