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अनूपपुर, 06 मई (हि.स.)। आदि गुरू शंकराचार्य जन्म जयंती पखवाड़ा में बुधवार जिला स्तरीय व्याख्यान माला का आयोजन जन अभियान परिषद अनूपपुर ने किया गया।
कार्यक्रम में म.प्र. राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) रामलाल रौतेल, अपर कलेक्टर दिलीप कुमार पाण्डेय, अमरकंटक के प्रधान पुजारी पंडित धनेश वन्दे महाराज, जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक भीम सिंह डामोर, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक उमेश पाण्डेय, नवांकुर संस्थाओं के प्रतिनिधिगण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं सीएमसीएलडीपी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ शंकराचार्य जी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया।
म.प्र. राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) रामलाल रौतेल ने आदि गुरु शंकराचार्य जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आदि शंकराचार्य जी ने सनातन परंपरा को एक सूत्र से जोड़कर रखने के लिए देश के चार धामों में मठों की स्थापना की। आदि गुरु शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत के दर्शन का विस्तार किया। उन्होंने उपनिषदों, भगवद् गीता और ब्रम्हसूत्रों के प्राथमिक सिद्धांतों जैसे हिंदू धर्मग्रंथों की व्याख्या एवं पुनर्व्याख्या की।
अपर कलेक्टर दिलीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने सम्पूर्ण राष्ट्र को एक संस्कृति सूत्र में पिरोने का महान कार्य किया था। यह जयंती पखवाड़ा हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर अमरकंटक के प्रधान पुजारी पंडित धनेश वन्दे महाराज ने आदि गुरु शंकराचार्य जी के अद्वैत वेदांत दर्शन, भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं समाज को एक सूत्र में बांधने में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी ने अपने अल्प जीवनकाल में संपूर्ण भारत की यात्रा कर सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक भीम सिंह डामोर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला