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अनुशासन, परिश्रम और समर्पण से मिलती है सफलता: कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा
वाराणसी,17 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या विभाग ने एक बार पुनः अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक परम्परा एवं संस्कारमयी शिक्षा का परिचय देते हुए गौरवपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। विभाग के दो प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में श्यामशंकर तिवारी एवं आनन्द द्विवेदी का चयन भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) पद पर हुआ है।
विद्यार्थियों की इस सफलता से विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष एवं गौरव का वातावरण व्याप्त है। छात्रों के सेना में चयन के बाद विभागाध्यक्ष डॉ. रविशंकर पाण्डेय एवं विभाग के आचार्यों ने दोनों का अभिनन्दन किया। इस अवसर पर आचार्यो ने छात्रों की सफलता को संस्कृत शिक्षा की व्यापक उपयोगिता एवं राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका का सशक्त उदाहरण बताया।
विशेष रूप से छात्र आनन्द द्विवेदी की उपलब्धियाँ विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत मानी जा रही हैं। वे प्रारम्भ से ही विभाग के अनुशासित, मेधावी एवं सक्रिय विद्यार्थी रहे हैं। आचार्य पाठ्यक्रम में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर उन्हें प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने “सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक” से सम्मानित किया है। साथ ही उन्होंने छह बार यूजीसी नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी असाधारण शैक्षणिक क्षमता का परिचय दिया है। विभागीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय सहभागिता सदैव उल्लेखनीय रही है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने चयनित विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को ऐसे कर्मठ एवं अनुशासित छात्रों से प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा केवल परम्परा और ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रसेवा, नेतृत्व, अनुशासन एवं व्यक्तित्व निर्माण की भावना को भी सुदृढ़ करती है।
विभागाध्यक्ष डॉ. रविशंकर पाण्डेय ने कहा कि विद्यार्थियों की यह सफलता संस्कृत अध्ययन के व्यापक आयामों को रेखांकित करती है तथा यह सिद्ध करती है कि संस्कृत का विद्यार्थी प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह उपलब्धि विभाग के अन्य विद्यार्थियों को भी परिश्रम, समर्पण एवं राष्ट्रसेवा के प्रति प्रेरित करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी