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शिमला, 08 दिसंबर (हि.स.)। राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश ने धर्मशाला में हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र के दौरान आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर कुछ स्वर्ण वर्ग के विधायकों के रुख को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। महासभा ने आपातकालीन आभासी बैठक कर कहा कि स्वर्ण समाज के ही जनप्रतिनिधियों द्वारा आरक्षण बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव पेश किए गए, जो उच्चतम न्यायालय की स्पष्ट व्यवस्था वर्गीकरण, आर्थिक आधार और क्रीमी लेयर की नीति के विपरीत हैं।
महासभा के अध्यक्ष ई.के.एस. जम्वाल और महासचिव विजय चंदेल ने संयुक्त बयान में कहा कि शाहपुर और नगरोटा विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधियों द्वारा एक विशेष समुदाय का आरक्षण 13 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की मांग ने स्वर्ण समाज में गहरी चिंता और असंतोष पैदा किया है। महासभा ने इसे समाज के हितों के प्रतिकूल और सामाजिक संतुलन को प्रभावित करने वाला कदम बताया।
महासभा ने स्पष्ट किया कि वह संविधान की व्यवस्था, आर्थिक आधार और क्रीमी लेयर सिद्धांत का समर्थन करती है, ताकि वास्तव में वंचित और जरूरतमंद परिवारों को आरक्षण का लाभ मिले। महासभा ने कहा कि वह लंबे समय से सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आय सीमा 4 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये करने की मांग उठा रही है, परंतु इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर स्वर्ण वर्ग के जनप्रतिनिधियों का मौन रहना समाज में निराशा पैदा कर रहा है।
समाज ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे अपने समाज सहित सभी वर्गों के हितों की रक्षा करें। महासभा ने निर्णय लिया है कि—जब तक संबंधित विधायक समाज के मुद्दों पर सकारात्मक और स्पष्ट रुख नहीं अपनाते, तब तक स्वर्ण समाज उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में बहिष्कार का रास्ता अपनाएगा।
राजपूत महासभा ने कहा कि समाज सौहार्द, संवाद और शांतिपूर्ण माहौल के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद करता है कि भविष्य में जनप्रतिनिधि संविधान और सामाजिक संतुलन का सम्मान करते हुए निर्णय लेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा