'आईएनडीआईए' मामले में जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र व विपक्षी दलों को मिला एक हफ्ते का वक्त
दिल्ली हाई कोर्ट ने विपक्षी दलों के गठबंधन आईएनडीआईए यानी इंडियन नेशनल डवलपमेंट इन्क्लूसिव अलायंस के नाम के संक्षिप्त फॉर्म के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार और विपक्षी दलों को एक सप्ताह का समय दिया है।
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नई दिल्ली, 2 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने विपक्षी दलों के गठबंधन आईएनडीआईए यानी इंडियन नेशनल डवलपमेंट इन्क्लूसिव अलायंस के नाम के संक्षिप्त फॉर्म के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार और विपक्षी दलों को एक सप्ताह का समय दिया है। कार्यकारी चीफ जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि जवाब दाखिल करने का ये अंतिम मौका होगा। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को करने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील वैभव सिंह ने कहा कि याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने आठ मौके दिए हैं, लेकिन प्रतिवादियों ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया। उसके बाद कोर्ट ने केंद्र और आईएनडीआईए के सभी विपक्षी दलों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का अंतिम मौका दिया।

इस मामले पर अभी तक केवल निर्वाचन आयोग ने अपना जवाब दाखिल किया है। निर्वाचन आयोग ने हलफनामे कहा है कि वह जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत राजनीतिक गठबंधनों को विनियमित नहीं कर सकता है। निर्वाचन आयोग ने इस विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि राजनीतिक गठबंधनों के कामकाज को विनियमित करने के लिए संवैधानिक निकाय को अनिवार्य करने वाला कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि राजनीतिक गठबंधन जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत मान्यता प्राप्त नहीं होते।

इसके पहले कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र, निर्वाचन आयोग और विपक्षी दलों को नोटिस जारी किया था। याचिका बिजनेसमैन गिरीश भारद्वाज ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि इस नाम की वजह से चुनाव में कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। याचिकाकर्ता ने इसके पहले निर्वाचन आयोग को 19 जुलाई को पत्र लिखा था लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया जिसके बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

याचिका में कहा गया है कि पार्टियों ने अनुचित लाभ उठाने के लिए गठबंधन का नाम इंडिया रखा है। संक्षिप्त फॉर्म आईएनडीआईए केवल सहानुभूति बटोरने और वोट हासिल करने के लिए किया गया है। इसका इस्तेमाल आगे राजनीतिक फायदे के लिए किया जा सकता है और लोगों की भावनाएं भड़काई जा सकती हैं जो कानून-व्यवस्था के लिए समस्या पैदा करेगा। आईएनडीआईए राष्ट्रीय प्रतीक का हिस्सा है जिसका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं किया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय/संजीव/पवन