लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा में राजनैतिक सरगर्मी बढ़ी, कांग्रेस में गतिविधि शून्य
मंत्री केदार कश्यप को उम्मीदवार नहीं बनाया जाता है तो नये उम्मीदवार उतार सकती है भाजपा जगदलपुर, 09
केदार कश्यप व दीपक बैज


मंत्री केदार कश्यप को उम्मीदवार नहीं बनाया जाता है तो नये उम्मीदवार उतार सकती है भाजपा

जगदलपुर, 09 फरवरी (हि.स.)। लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी की तैयारी जमीनी स्तर पर गांव चलो अभियान के साथ शुरू हो गया है, वहीं भाजपा के बस्तर लोकसभा के नियुक्त पर्वेक्षक बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुंचकर लोकसभा क्षेत्र में आने वाले 06 जिलों के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश संगठन तक पहुंचा दी है। इसके बाद से ही बस्तर लोकसभा सीट के लिए भाजपा में राजनैतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

भाजपा में चर्चा में है कि कश्यप परिवार से केदार कश्यप को लोकसभा चुनाव के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार माना जा रहा है। लेकिन केदार कश्यप वर्तमान में प्रदेश में वन मंत्री के पद पर हैं। वहीं पूर्व सांसद दिनेश कश्यप, बस्तर जिले के भाजपा अध्यक्ष रूपसिंह मांडवी, पूर्व चित्रकूट विधायक लच्छूराम कश्यप, कोंडागांव विधायक लता उसेंडी, पूर्व विधायक डॉ. शुभाउ कश्यप, पूर्व विधायक महेश गागडा के नाम भी सामने आ रहे हैं।

भाजपा में यह चर्चा का विषय है कि कश्यप परिवार के ही पूर्व सांसद दिनेश कश्यप को उम्मीदवार बनाने बनाए जाने को लेकर एक परिवार से विधायक मंत्री और अब सांसद के लिए उम्मीदवार बयान बनाया जाना सबसे बड़ा बाधक बनकर सामने आ रहा है। वहीं पूर्व सांसद दिनेश कश्यप की पत्नी वेदवती कश्यप जिला पंचायत के अध्यक्ष पद पर होना भाजपा में परिवारवाद के विषय पर बड़ी बाधा माना जा रहा है।भाजपा में परिवारवाद का मुद्दा यदि हावी रहता है तो दिनेश कश्यप को लोकसभा का उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना बहुत कम है। यदि मंत्री केदार कश्यप को लोकसभा का उम्मीदवार नही बनाया जाता है तो किसी नये उम्मीदवार पर अपना दांव खेल सकती है।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में लोकसभा चुनाव को लेकर बस्तर में कोई गतिविधि देखने को नहीं मिल रही है, कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज व्यस्त हैं। लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की शून्य गतिविधि से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस के बस्तर सांसद दीपक बैज को पुन: मैदान में उतार सकती है। बस्तर सांसद दीपक बैज वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी है, इससे उनको कांग्रेस मैदान में फिर से लोकसभा का उम्मीदवार बना सकती है। लेकिन बस्तर सांसद दीपक बैज चित्रकोट से विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, यदि इस आधार पर दीपक बैज को उम्मीदवार नहीं बनाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में कांग्रेस के पांच बार के विधायक कवासी लखमा को मैदान में उतार सकती है।

बस्तर के लोकसभा चुनाव में यह देखा गया है कि मध्य बस्तर का उम्मीदवार ही ज्यादातर प्रभावी रहता है। दोनों प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा-कांग्रेस का उम्मीदवार मध्य बस्तर से बनाये जाने की ज्यादा उम्मीद है। जिसमें भाजपा से केदार कश्यप और कांग्रेस से दीपक बैज के मध्य मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार/राकेश पांडे