बंगाल से रामभक्तों को लेकर अयोध्या धाम रवाना हुई तीन आस्था स्पेशल ट्रेनें
हावड़ा, 06 फरवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल से राम भक्तों को लेकर अयोध्या धाम के लिए सोमवार शाम तीन आस्था
हावड़ा से रामभक्तों को लेकर अयोध्या धाम रवाना हुई आस्था स्पेशल ट्रेनें


हावड़ा से रामभक्तों को लेकर अयोध्या धाम रवाना हुई आस्था स्पेशल ट्रेनें


हावड़ा, 06 फरवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल से राम भक्तों को लेकर अयोध्या धाम के लिए सोमवार शाम तीन आस्था स्पेशल ट्रेन रवाना हुई। इनमें से दो ट्रेनें हावड़ा स्टेशन से जबकि एक ट्रेन उत्तर बंगाल से अयोध्या के लिए रवाना हुई।

रामलला के दर्शन के लिए हावड़ा स्टेशन से 2788 रामभक्तों को लेकर सोमवार शाम दो आस्था स्पेशल ट्रेनें अयोध्या रवाना हो गईं। पूरे स्टेशन परिसर में इस दौरान जय श्री राम के नारे गूंजते रहे। एक ट्रेन हावड़ा स्टेशन के न्यू कॉम्प्लेक्स के प्लेटफार्म संख्या 22 से रवाना हुई तो वहीं दूसरी आस्था स्पेशल ट्रेन प्लेटफार्म संख्या आठ से रवाना हुई। इस दौरान रेलवे की ओर से सुरक्षा के चाक चौबंद प्रबंध देखे गए। बड़ी संख्या में रेल पुलिस के जवान प्लेटफार्म पर मौजूद रहे।

इस दौरान हावड़ा स्टेशन के न्यू कांप्लेक्स के प्लेटफार्म संख्या 22 पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। आईआरसीटीसी की ओर से रामभक्तों को आश्वस्त किया गया कि यात्रा के दौरान उन्हें हर प्रकार का सहयोग किया जाएगा और किसी भी रामभक्त को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सह मंत्री स्वपन कुमार मुखर्जी ने बताया कि संघ परिवार से जुड़े ये रामभक्त छह और सात फरवरी को अयोध्या में रहेंगे और आठ फरवरी को इसी ट्रेन से वापसी के लिए रवाना हो जाएंगे। मुखर्जी ने बताया कि उत्तर बंगाल से भी सोमवार को एक आस्था स्पेशल ट्रेन अयोध्या के लिए रवाना हुई है। तकरीबन साढ़े तीन हजार श्रद्धालु इन तीनों ट्रेनों से रामलला के दर्शन को निकले हैं। उन्होंने आगे कहा कि सभी श्रद्धालुओं ने अपना खर्च स्वयं वहन किया है। इस सफर की व्यवस्था करने के लिए रामभक्तों की ओर से मुखर्जी ने भारतीय रेल और आईआरसीटीसी का धन्यवाद किया।

ट्रेन में सवार पोर्ट ब्लेयर के कार्यकर्ता शंकर ने बताया कि 23 वर्ष पहले 25 कारसेवकों के समूह में वह जलमार्ग से पोर्ट ब्लेयर से हावड़ा आए थे और यहीं से ट्रेन पकड़ कर अयोध्या कार सेवा के लिए रवाना हुए थे। यह उनका परम सौभाग्य है कि 23 वर्ष बाद उन्हें पुनः प्रभु की नगरी में जाने का मौका मिला है। उन्होंने बताया कि विवादित ढांचे के विध्वंस के दिन लाखों लोगों की भीड़ थी। ढांचे को गिराए जाने के बाद अंडमान के कारसेवकों ने मोर्चा संभाला था और सफाई की जिम्मेवारी बाखूबी निभाई थी। रामलाल के दर्शन को लेकर सभी रामभक्तों में बहुत उत्साह देखा गया।

हिन्दुस्थान समाचार/धनंजय