तमिलनाडु में केएफडी से निपटने को लेकर लिए दिशा-निर्देश जारी
चेन्नई (तमिलनाडु), 12 फरवरी (हि.स.)। कर्नाटक में क्यासानूर वन रोग (केएफडी) के 53 मानव केस सामने आने
तमिलनाडु में केएफडी से निपटने को लेकर लिए दिशा-निर्देश जारी


चेन्नई (तमिलनाडु), 12 फरवरी (हि.स.)। कर्नाटक में क्यासानूर वन रोग (केएफडी) के 53 मानव केस सामने आने के बाद तमिलनाडु में भी सतर्कता बरतने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य निदेशालय ने केएफडी को लेकर इरोड, नीलगिरी, धर्मपुरी और कृष्णागिरी में स्वास्थ्य सेवाओं के उप निदेशकों को निगरानी बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

डायरेक्टरेट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड प्रीवेंटिव मेडिसिन द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि क्यासानूर वन रोग एक वायरस के कारण होता है। मनुष्यों में यह संक्रमित टिक के काटने के बाद या किसी संक्रमित जानवर, विशेष रूप से बीमार या हाल ही में मृत बंदर के संपर्क के कारण होता है। स्वास्थ्य निदेशालय ने अधिकारियों को कर्नाटक और केरल के सभी सीमावर्ती गांवों की मैपिंग करने और योग्य आबादी की गणना करने की सलाह दी है। इसी के साथ कहा है कि बुखार की नियमित निगरानी होनी चाहिए और रोगियों से सीरम के नमूने एकत्र किए जाने चाहिए और वन अधिकारियों को बंदरों की मौत की उचित निगरानी करनी चाहिए।

स्वास्थ्य निदेशालय ने वन अधिकारियों को बंदरों की मौत की रिपोर्ट करने और बीमारी के बारे में समुदाय में जागरूकता पैदा करने और उन क्षेत्रों में लोगों को जाने की अनुमति नहीं देने, जहां बंदरों की मौत की सूचना मिल रही है, को कहा है। यह भी कहा गया है कि मवेशियों की नियमित धुलाई और सफाई तथा अन्य प्रबंधन पर निगरानी रखना अत्यंत आवश्यक है।

केएफडी के लक्षण अचानक ठंड लगना, बुखार और सिरदर्द के साथ शुरू होते हैं। शुरुआती लक्षण शुरू होने के 3-4 दिन बाद उल्टी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण और रक्तस्राव की समस्याओं के साथ मांसपेशियों में गंभीर दर्द हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार/आरबी चौधरी /वीरेन्द्र