हिंदू राज नहीं राम राज्य चाहिए : शंकराचार्य
हिंदू राष्ट्र के नाम पर जुमलेबाजी बंद हो देश-समाज को बांटने वाले राजनैतिज्ञों पर प्रतिबंध लगाए चुनाव
ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज बातचीत करते हुए


हिंदू राष्ट्र के नाम पर जुमलेबाजी बंद हो

देश-समाज को बांटने वाले राजनैतिज्ञों पर प्रतिबंध लगाए चुनाव आयोग

मथुरा, 06 मार्च (हि.स.)। सोमवार शाम ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि देश को हिंदू राज नहीं बल्कि रामराज्य चाहिए। केवल हिंदू राष्ट्र की बातें करना और नामकरण की जुमलेबाजी करना ही पर्याप्त नहीं बल्कि ऐसे लोग हिंदू राष्ट्र का प्रारूप भी सामने रखें, जिस पर विचार किया जाए कि इसके निर्माण के बाद लोगों के जीवन में क्या सकारात्मक परिवर्तन होंगे।

देश को यह विस्तार से बताने की जरूरत है कि गंगा सदा से ही पवित्र नदी है, उसमें गंदा जल राष्ट्रीय नदी बनने से पूर्व भी डाला जाता रहा और उसकी दशा में राष्ट्रीय नदी का दर्जा देने के बाद क्या सुधार हुए, यह विचारने की जरूरत है। अतः केवल हिंदू राष्ट्र नहीं हमें रामराज्य लाने पर विचार करना चाहिए क्योंकि तभी धर्म बचेगा और धर्म के चिन्ह भी बचेंगे। हिंदू राष्ट्र के नाम पर जुमलेबाजी बंद हो।

उन्होंने चेताया कि समस्या तब से खड़ी हुई है जब से राजनैतिज्ञों से धर्म की बातें सुनना लोगों ने शुरू किया है। आज देश में गौमांस का निर्यात बढ़ा है, इसपर किसी का ध्यान नहीं।

रामचरितमानस के अपमान पर बोले- हिन्दू धर्म, देश और समाज में फूट डालना मंशा

रामचरितमानस के अपमान पर उन्होंने कहा कि राजनैतिक लोग बहुसंख्यक भारतीय जनमानस द्वारा स्वीकृत और वंदनीय रामचरितमानस का अपमान कर अपना असल चरित्र दिखा रहे हैं। उनकी मंशा हिन्दू धर्म, देश और समाज में फूट डालना है। खेद का विषय यह है कि चुनाव आयोग भी इस मसले पर चुप्पी साधे है, जबकि ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

काशी और मथुरा के बारे में उन्होंने कहा कि पूर्वकाल में किन्ही राजनैतिक परिस्थितियों से हिंदू तीर्थों में बने इन मंदिरों को क्षति उठानी पड़ी। जिसे अब सुधारना चाहिए क्योंकि इतिहास सनातन धर्म के इन स्थलों पर राम, कृष्ण और शिव के अस्तित्व के प्रमाणों से भरा पड़ा है। जिसे अयोध्या के मामले ने सुप्रीम कोर्ट तक ने स्वीकारा है। और यूं भी दूसरे धर्म के स्थान अथवा मंदिर पर कब्जा कर बनाई गई भूमि पर इबादत करना इस्लाम के धार्मिक सिद्धांतों के विरुद्ध माना गया है।

हिन्दुस्थान समाचार/महेश