रुपये ने फिर बनाया कमजोरी का नया रिकॉर्ड, डॉलर के मुकाबले 81.58 रुपये तक पहुंची भारतीय मुद्रा
वैश्विक दबाव, मंदी की आशंका, विदेशी निवेशकों की ओर से घरेलू शेयर बाजार में की जा रही चौतरफा बिकवाली और डॉलर की लगातार बढ़ती मांग के कारण भारतीय मुद्रा रुपया सोमवार को एक बार फिर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।


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- 3 कारोबारी सत्रों के दौरान भारतीय मुद्रा में आई 1.70 रुपये की कमजोरी

नई दिल्ली, 26 सितंबर (हि.स.)। वैश्विक दबाव, मंदी की आशंका, विदेशी निवेशकों की ओर से घरेलू शेयर बाजार में की जा रही चौतरफा बिकवाली और डॉलर की लगातार बढ़ती मांग के कारण भारतीय मुद्रा रुपया सोमवार को एक बार फिर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा बाजार में भारतीय मुद्रा आज डॉलर की तुलना में 81.58 रुपये तक पहुंच गई।

इंटर बैंक फॉरेन सिक्योरिटी एक्सचेंज में आज रुपये ने 56 पैसे की कमजोरी के साथ 81.55 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की। डॉलर की लगातार बढ़ती मांग के कारण थोड़ी ही देर में भारतीय मुद्रा और तीन पैसे फिसल कर 81.58 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। पिछले 9 कारोबारी सत्रों में आज ये आठवां सत्र है, जब रुपया डॉलर के मुकाबले 2.2 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हुआ है। सिर्फ पिछले 3 कारोबारी सत्र में ही रुपये की कीमत में 1.70 रुपये प्रति डॉलर तक की कमजोरी आ चुकी है।

पिछले सप्ताह भी रुपये ने लगातार गिरावट का रुख दिखाया था। डॉलर की मांग में बढ़ोतरी होने के कारण पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान रुपया पहली बार 81 रुपये के स्तर से भी नीचे गिर कर 81.24 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में डॉलर की मांग में कमी आने की वजह से भारतीय मुद्रा की स्थिति में कुछ सुधार हुआ और इसने 80.99 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार का अंत किया था।

मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन का मानना है वैश्विक मंदी की आशंका के कारण विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करके अपना पैसा निकालने की कोशिश में लगे हुए हैं। जिसकी वजह से डॉलर इंडेक्स 20 साल के सबसे ऊंचे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर इंडेक्स फिलहाल मई 2002 के ऊपरी स्तर तक पहुंच चुका है, जिसकी वजह से भारतीय मुद्रा समेत दुनिया भर की तमाम मुद्राओं में जबरदस्त गिरावट आई है। फिलीपींस की मुद्रा पेसो में 0.57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि दक्षिण कोरिया की मुद्रा वार्न में 1.4 प्रतिशत, जापान की मुद्रा येन में 0.47 प्रतिशत, इंडोनेशिया की मुद्रा में 0.53 प्रतिशत और थाईलैंड की मुद्रा थाई बात में 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मयंक मोहन का मानना है कि रुपये में आई इस गिरावट की मुख्य वजह दुनिया भर के ज्यादातर देशों में ऊंचे स्तर पर पहुंची महंगाई और उसकी वजह से बनी वैश्विक मंदी की आशंका ही है। इस आशंका के कारण सभी विदेशी निवेशक अपना पैसा सुरक्षित करने के लिए चौतरफा बिकवाली करने में लगे हुए हैं। इस कारण दुनिया के ज्यादातर बाजारों में गिरावट का रुख बना हुआ है और उनकी राष्ट्रीय मुद्राएं डॉलर की तुलना में लुढ़कती जा रही हैं।

ऐसी स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर का सप्लाई बढ़ाकर रुपये की गिरावट को कुछ समय के लिए जरूर रोक सकता है, लेकिन रुपये में गिरावट तभी रुक सकेगी, जब वैश्विक मंदी की आशंका छंट जाए। जब तक मंदी का डर बना रहेगा, तब तक विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करके अपना पैसा निकालते रहेंगे। इसी वजह से डॉलर की मांग में भी तेजी बनी रहेगी और रुपया गिरता चला जाएगा। मयंक मोहन के अनुसार रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की सप्लाई होते रहने तक रुपये की गिरावट रुकी रहेगी, लेकिन डॉलर की सप्लाई रुकते ही रुपया एक बार फिर लुढ़कने लगेगा।

हिन्दुस्थान समाचार/योगिता पाठक


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