वायलेंस अगेंस्ट वूमेन सिर्फ हिंसा तक ही सीमित नहींः डॉ कचन
कानपुर, 21 सितम्बर (हि.स.)। वायलेंस अगेंस्ट वूमेन सिर्फ हिंसा तक ही सीमित न होकर जेंडर इन इक्वीलिटी
वायलेंस अगेंस्ट वूमेन सिर्फ हिंसा तक ही सीमित नहींः डॉ.कचन


कानपुर, 21 सितम्बर (हि.स.)। वायलेंस अगेंस्ट वूमेन सिर्फ हिंसा तक ही सीमित न होकर जेंडर इन इक्वीलिटी कार्य क्षेत्र में होने वाले पक्षपातपूर्ण बिहैवियर, महिलाओं के प्रति किया गया असम्मानजनक व्यवहार भी इसके अंतर्गत आता है। यह जानकारी गुरुवार को छात्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के स्कूल आफ हेल्थ साइंसेस में धीरा-से नो वायलेंस अगेंस्ट वूमन विषय पर आयोजित कार्यक्रम में कॉग्स की सचिव डॉ कंचन शर्मा ने दी।

उन्होंने बताया कि धीरा प्रोग्राम क्या है और कैसे इस प्रोग्राम के तहत लड़कियों, महिलाओं को वायलेंस अंगेस्ट वूमेन के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वायलेंस अगेंस्ट वूमेन सिर्फ हिंसा तक ही सीमित न होकर जेंडर इन इक्वीलिटी कार्य क्षेत्र में होने वाले पक्षपातपूर्ण बिहैवियर, महिलाओं के प्रति किया गया असम्मानजनक व्यवहार भी इसके अंतर्गत आता है।

कांग्स की अध्यक्ष डॉ उषा गोयनका ने छात्राओं को बताया कि महिलाओं के प्रति होने वाले, हिंसा, क्रूरता जैसे कि रेप, ऑनर किलिंग, लैंगिक असमानता करीबी लोगों, रिश्तेदार द्वारा ही किया जाता है। छात्रों एवं महिलाओं को वायलेंस अगेंस्ट वूमेन के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्हें यह पता होना चाहिए कि चुप रहना या फिर आवाज उठानी है अगर छात्राओं के साथ कक्षा में इस तरह का बर्ताव हो रहा है तो उसे टीचर को बताना चाहिए अपने मित्रों को बताना चाहिए और अगर समाज में ऐसा हो रहा है तो इस संबंध में महिलाओं को पुलिस में सूचना देनी चाहिए, अभिभावक एवं मित्रों को बताना चाहिए। प्रायः देखा जाता है कि समाज में लड़कियों के पैदा होते ही उस पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगाये जाते हैं व उसको लड़के की तुलना में उस पर कहीं पर भी आने जाने पर अपना कैरियर निर्धारित करने में भी तमाम प्रतिबंध लगाये जाते हैं। समाज की बढ़ती भौतिकता व उपभोग की लालसा ने विभिन्न तरह की टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को भी जन्म दिया है। इसी क्रम में साइबर क्राइम आज-कल बहुत ही कामन हो गया है। लड़कियों के एमएमएस बनाना, उनकी ईमेल, फेसबुक आईडी हैक करके उनके बारे में गलत प्रचार करने ब्लैकमेक करना। हालांकि इस तरह के सभी एक्ट में तीन माह के दण्ड का प्रावधान होने के बावजूद इस तरह की घटनायें समाज में रुक नहीं रही हैं। इसी क्रम में डा. वर्षा प्रसाद, डा. नीना गुप्ता, डा. शैली अग्रवाल व डा. संगीता आर्या, डा. रेनू गहलौत ने अपना-अपना बिचार रखा। यह कार्यक्रम छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से आयोजित किया गया।

संस्थान के निदेशक डा दिग्विजय शर्मा एवं सह निदेशक डा. मुनीश रस्तोगी ने सभी फाग्सी की सभी डाक्टरों का सम्मान स्मृति चिन्ह भेंट करके किया। डाक्टरों व अन्य अतिथिगणों को धन्यवाद भी ज्ञापित किया। सभागार में बड़ी संख्या में छात्राओं ने व छात्रों ने बढ़-चढ़कर इस बेहद से इण्टरएक्टिव सेशन में भाग लिया।

हिन्दुस्थान समाचार/राम बहादुर


 rajesh pande