मिर्च की फसल में करें नीम का प्रयोग, रोगों से निदान के साथ ही खाद का भी करेगा काम
- सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक ने दी सलाह, पर्ण कुंचन रोग से ग्रसित पौधों को हटा दें खेत से
प्रतिकात्मक फोटो


- सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक ने दी सलाह, पर्ण कुंचन रोग से ग्रसित पौधों को हटा दें खेत से

लखनऊ, 21 सितम्बर (हि.स.)। मौसम में हो रहे बदलाव के साथ ही हरी मिर्च की फसल में रोग भी लगने लगे हैं। इसके लिए किसानों को नीम के अर्क का प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ ही नीम की खली उसके जड़ों में डाला जाए तो पौधे पुष्ट होंगे। इसके साथ ही उन्हें तमाम रोगों से निजात मिलेगी।

इस संबंध में सब्जी अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक डाॅ एपी सिंह ने बताया कि सब्जियों में नीम का प्रयोग बहुत लाभ दायक है। इससे तमाम रोगों का उपचार दूसरी दवाओं की अपेक्षा कम लागत में की जा सकती है। यह प्रयोग सिर्फ जैविक खेती के लिए ही नहीं, उर्वरक डालने वाले किसानों के लिए भी अच्छा है।

डाॅ एपी सिंह ने कहा कि मिर्च में सर्वाधिक थ्रिप्स रोग का प्रभाव होता है। इस रोग को वैज्ञानिक भाषा में सिटरोथ्रिटस डोरसेलिस हुड कहते हैं। छोटी अवस्था में ही कीट पौधों की पत्तियों एवं अन्य मुलायम भागों से रस चूसते हैं, जिसके कारण पत्तियां ऊपर की ओर मुड़ कर नाव के समान हो जाती है। इसके लिए भी नीम बीज का अर्क चार प्रतिशत में छिड़काव करना फायदेमंद होता है। इसके साथ ही एसिटामिप्रिड या इमिडक्लोप्रिड .3 ग्राम एक लीटर या थायोमिथम्जाम .3 ग्राम एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

पर्ण कुंचन रोग के संबंध में उन्होंने बताया कि यह रोग विषाणु जनित होता है, जो कि तंबाकूपर्ण कुंचन विषाणु से होता है। रोग के कारण पौधें की पत्तियां छोटी होकर मुड़ जाती है तथा पौधा बोना हो जाता है। यह रोग सफेद मक्खी कीट के कारण एक-दूसरे पौधे पर फैलता है। इस रोग के लिए कोई भी दवा बहुत असरकारक नहीं है। इसके लिए पौधों को हटाना ही उपयुक्त तरीका है।

हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र


 rajesh pande