जमानत याचिका के साथ ही पेश हो केस डायरी व आपराधिक ब्यौरा...ताकि पहली तारीख पर ही मिले न्याय- हाईकोर्ट
जयपुर, 5 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालत से निस्तारित होने वाले मुकदमों की जानकारी संबंधित
जमानत याचिका के साथ ही पेश हो केस डायरी व आपराधिक ब्यौरा...ताकि पहली तारीख पर ही मिले न्याय- हाईकोर्ट


जयपुर, 5 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालत से निस्तारित होने वाले मुकदमों की जानकारी संबंधित थाने को नहीं होने के मामले में गृह सचिव की अध्यक्षता में एएजी जीएस राठौड़ और न्यायमित्र जसवंत सिंह को अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ शामिल करते हुए एक कमेटी का गठन किया है। अदालत ने कहा है कि कमेटी 25 अगस्त तक रिपोर्ट पेश कर बताए कि आपराधिक रिकॉर्ड को हर स्टेज पर किस तरह व्यवस्थित रखा जा सकता है और अदालत में किस तरह सही जानकारी पेश की जा सकती है। इसके अलावा अदालत ने केस डायरी पेश करने के संबंध में भी कमेटी से जानकारी मांगी है। जस्टिस समीर जैन ने यह आदेश लूसी की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान गृह सचिव श्रवण कुमार, एडीजी रविप्रकाश मेहरडा और आईजी एससीआरबी शरद कविराज सहित अन्य पुलिस अधिकारी पेश हुए। वहीं एएजी जीएस राठौड़ ने प्रार्थना पत्र पेश कर कहा कि अदालती आदेश की पालना में डीजीपी पेश नहीं हुए हैं। डीजीपी के हर्निया का ऑपरेशन होने के कारण वे वर्दी पहनने में असमर्थ हैं। इस पर न्यायमित्र ने अखबार पेश कर कहा कि डीजीपी सिविल ड्रेस में सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बडे अधिकारियों का ऐसा रवैया है कि वे आदेश के बावजूद कोर्ट में नहीं आ रहे हैं, लेकिन समारोह में जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि कोर्ट में जमानत याचिका पेश होने के बाद दो-तीन दिन में लिस्ट होती है। उसके बाद कोर्ट केस डायरी मंगाती है। ऐसे में आरोपित चाहे निर्दोष ही क्यों ना हो, उसे पन्द्रह दिन जेल में रहना पड जाता है। इसलिए ऐसी व्यवस्था हो की आपराधिक रिकॉर्ड कोर्ट, पुलिस और अभियोजन पक्ष के बीच तत्काल मौजूद रहे। ताकि पहली तारीख पर ही न्याय मिल सके। अदालत ने कहा कि पुलिस तथ्यात्मक रिपोर्ट भी गलत पेश करती है। हम छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई के बजाए सिस्टम में सुधार चाहते हैं। कोर्ट में यंग जनरेशन है तो आपका सिस्टम भी यंग होना चाहिए। वहीं एएजी ने बताया कि कोर्ट के आदेश की कॉपी आरोपी पक्ष को तत्काल मिल जाती है, लेकिन सरकारी पक्ष को कई दिनों में मिलती है और उसके बाद प्रक्रिया में करीब पांच से छह माह लगने के बाद पुलिस को जानकारी मिल पाती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के सुपरविजन में आईसीजेएस सॉफ्टवेयर पर काम चल रहा है। इसके आसानी से आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी मिल जाएगी। गौरतलब है कि एनडीपीएस प्रकरण की अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान अजमेर के दरगाह थाना पुलिस की ओर याचिकाकर्ता के मुकदमों की गलत जानकारी देने पर अदालत ने डीजीपी और गृह सचिव को पेश होकर स्पष्टीकरण देने को कहा था।

हिन्दुस्थान समाचार/पारीक/संदीप

 

 rajesh pande