भारत की चीन को सख्त चेतावनी- लद्दाख बॉर्डर से दूर रखें फाइटर जेट
ताइवान से तनाव के बीच भारत ने चीन को लद्दाख बॉर्डर से अपने फाइटर जेट दूर रखने की चेतावनी दी है। भारत ने चीन के सैन्य अधिकारियों को बुलाकर पूर्वी लद्दाख में चीन की उकसावे वाली गतिविधियों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया है।
वायु सेना


- पूर्वी लद्दाख में चीन की उकसावे वाली गतिविधियों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया

- सेना के मेजर जनरल के नेतृत्व में हुई बैठक में वायु सेना को भी शामिल किया गया

नई दिल्ली, 05 अगस्त (हि.स.)। ताइवान से तनाव के बीच भारत ने चीन को लद्दाख बॉर्डर से अपने फाइटर जेट दूर रखने की चेतावनी दी है। भारत ने चीन के सैन्य अधिकारियों को बुलाकर पूर्वी लद्दाख में चीन की उकसावे वाली गतिविधियों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया है। बैठक में भारत ने चीनी पक्ष को साफ कर दिया कि विमान उड़ाते वक्त अपनी सीमा में रहकर एलएसी और 10 किमी. सीबीएम लाइन का पालन करें। यह पहली ऐसी विशेष सैन्य बैठक थी, जो सेना के मेजर जनरल के नेतृत्व में हुई और इसमें वायु सेना को भी शामिल किया गया।

चीन के सैन्य अधिकारियों के साथ भारत की यह गोपनीय बैठक मंगलवार को उस दिन हुई थी, जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ताइवान की यात्रा पर थीं। उसी दिन पूर्वी लद्दाख में सीमा पर भी चीन की हवाई गतिविधियां बढ़ीं थीं। इसके जवाब में भारत की वायु सेना ने भी अपने लड़ाकू विमान आसमान में तैनात कर दिए थे। भारत और चीन की वायु सेनाओं के लड़ाकू विमानों ने कई घंटे तक एलएसी के पास लगातार उड़ान भरी। चीन सीमा के पास एक अग्रिम एयरबेस से भारतीय वायु सेना अपने लड़ाकू विमानों को शामिल करते हुए अब गहन रात्रि अभियान चला रही है।

अमेरिकी स्पीकर की यात्रा से उपजे तनाव के बीच भारत और चीन के अधिकारियों की यह बैठक भारतीय इलाके चुशूल मोल्डो में हुई। बैठक में भारत ने चीनी पक्ष को लद्दाख बॉर्डर से अपने फाइटर जेट दूर रखने की दो टूक सख्त चेतावनी दी। दरअसल, भारत और चीन ने आपसी विश्वास बहाली उपायों के तहत एलएसी पर 10-10 किमी. का नो फ़्लाइंग जोन घोषित कर रखा है। इसे 'कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर' (सीबीएम) का नाम दिया गया है। इसलिए बैठक में भारत ने यह भी साफ कर दिया कि चीनी वायु सेना विमान उड़ाते वक्त अपनी सीमा में रहने के साथ ही एलएसी और 10 किमी. सीबीएम लाइन का पालन करे।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह विशेष सैन्य बैठक मेजर जनरल के नेतृत्व में हुई। हालांकि भारत ने चीन के साथ सैन्य स्तर की यह बैठक बुलाई थी लेकिन इस बैठक में वायु सेना के प्रतिनिधि के तौर पर एयर कोमोडोर भी मौजूद रहे। भारत ने पूर्वी लद्दाख में चीन की उकसावे वाली गतिविधियों को लेकर विरोध दर्ज कराया। भारत ने चीन को यह चेतावनी ऐसे वक्त पर दी है, जब उसका ताइवान के साथ विवाद चल रहा है। अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद से चीन भड़का हुआ है और इसके विरोध में ताइवान की सीमा से लगे इलाकों में सैन्य अभ्यास भी कर रहा है।

दरअसल, पिछले दिनों चीन के लड़ाकू विमान भारत की सीमा के काफी नजदीक आ गए थे। पूर्वी लद्दाख में चीनी जेट ने पहली बार 28 जून को भारतीय चौकियों के पास उड़ान भरी थी। इसके बाद 24 जुलाई को भी चीनी लड़ाकू विमान भारतीय सीमा में 10 किमी. अंदर तक घुसे थे। पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीनी वायु सेना की गतिविधियां बढ़ने के बाद मिग-29 और सुखोई-30 एमकेआई सहित अन्य लड़ाकू विमान अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टरों के साथ उड़ान भर रहे हैं। अपाचे हेलीकॉप्टरों के पायलटों को उनके नाइट विजन गॉगल्स के साथ उड़ान भरते देखा जा सकता है। उच्चतम स्तर का सैन्य नेतृत्व पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में नियमित रूप से निगरानी रख रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम

 

 rajesh pande