एक सौ चार साल की उम्र में हुआ हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट, मिली जीवन की नई आशा
जयपुर, 5 अगस्त (हि.स.)। कार्डियक साइंस के क्षेत्र में जयपुर में एक बार फिर नया कीर्तिमान रचा गया है।
104 साल की उम्र में हुआ हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट, मिली जीवन की नई आशा


जयपुर, 5 अगस्त (हि.स.)। कार्डियक साइंस के क्षेत्र में जयपुर में एक बार फिर नया कीर्तिमान रचा गया है। देश में अब तक के सबसे अधिक उम्र के मरीज में बिना सर्जरी के हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट प्रोसीजर टावी (ट्रांस कैथेटर एओर्टिक वॉल्व इंप्लांटेशन) हुआ है। शहर के इटर्नल हॉस्पिटल में यह प्रोसीजर डॉ. अमित चौरसिया व उनकी टीम ने कर दिखाया है। इससे पहले भारत में 92 वर्ष तक के मरीज का टावी तकनीक से सफल केस रिपोर्ट किया गया है। शुक्रवार को हुई इर्टनल हॉस्पिटल में हुई प्रेस वार्ता में डॉक्टर्स ने केस के बारे में जानकारी दी और साथ ही मरीज ने भी अपना अनुभव साझा किया।

हॉस्पिटल के स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज डायरेक्टर डॉ. अमित चौरसिया ने बताया कि मरीज को छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी जिसके चलते वे यहां हॉस्पिटल आए थे। 2डी ईको जांच में उनके हार्ट के एओर्टिक वॉल्व में सिकुड़न देखी गई थी, तभी उन्हें वॉल्व रिप्लेसमेंट की सलाह दी गई थी। उनका एंजियोग्राम भी किया गया जिसमें सामान्य ब्लॉकेज थे। ऐसे में यह स्पष्ट हो गया कि एओर्टिक स्टेनोसिस के कारण ही उन्हें छाती में दर्द हो रहा था। वॉल्व रिप्लेसमेंट का प्रक्रिया को समझते हुए उन्होंने प्रोसीजर के लिए तुरंत अनुमति दे दी। काफी ज्यादा उम्र होने के कारण सर्जरी से वॉल्व रिप्लेसमेंट संभव नहीं था इसीलिए टावी तकनीक से उनका वॉल्व बदला गया। सिर्फ डेढ़ घंटे में ही पूरा प्रोसीजर हो गया और उन्होंने अगले दिन चलना-फिरना शुरू भी कर दिया। प्रोसीजर के चौथे दिन मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

मरीज का शुरूआती ट्रीटमेंट हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी डायरेक्टर डॉ. आलोक माथुर देख रहे थे। उन्होंने बताया कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर की भी बात करें इटर्नल हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. समीन शर्मा के द्वारा न्यूयॉर्क में 105 वर्ष की महिला का टावी प्रोसीजर सफलतापूर्वक किया जा चुका है। भारत में 104 साल की उम्र में टावी से ट्रीटमेंट अपने आप में बड़ी उपलब्धि है जोकि जयपुर के हॉस्पिटल द्वारा दर्ज हुई है। कार्डियक सांइस विभाग के चेयरमैन डॉ. अजीत बाना ने कहा कि एओर्टिक स्टेनोसिस से जूझ रहे मरीजों में दवाएं कम काम करती हैं। अगर बीमारी का इलाज दवाओं से ही जारी रहता है तो बीमारी होने के पहले वर्ष में जीवित रहने की संभावना 50 प्रतिशत और दूसरे वर्ष में सिर्फ 20 प्रतिशत ही रह जाती है। टावी उन लोगों के लिए एक सुरक्षित विकल्प है जिन्हें ओपन सर्जरी से हाई व मिडियम रिस्क है।

केस को सफल बनाने में स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज एक्सपर्ट डॉ. प्रशांत द्विवेदी, नॉन इनवेसिव कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत चतुर्वेदी, कार्डियक एनस्थेटिस्ट डॉ. नवनीत मेहता का विशेष सहयोग रहा। हॉस्पिटल की को-चेयरपर्सन मंजू शर्मा व सीईओ डॉ. प्राचीश प्रकाश ने कहा कि यह बड़ी उपलब्धि है कि देश के सबसे बुजुर्ग पेशेंट का टावी प्रोसीजर जयपुर में हुआ है और वर्ल्ड क्लास ट्रीटमेंट फैसिलिटी जयपुर में उपलब्ध कराने में इटर्नल हॉस्पिटल का महत्वपूर्ण योगदान है।

हिन्दुस्थान समाचार/ दिनेश/संदीप

 

 rajesh pande