अनूपपुर: खरीफ की मात्र 77 फीसदी बुवाई, किसानों की बढ़ी चिंता, मानसून पड़ा कमजोर
पिछले वर्ष की तुलना में भी 100 मिमी कम बारिश, धान की ब्रीडिंग हो सकती है प्रभावित अनूपपुर, 02 अगस्त
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पिछले वर्ष की तुलना में भी 100 मिमी कम बारिश, धान की ब्रीडिंग हो सकती है प्रभावित

अनूपपुर, 02 अगस्त (हि.स.)। जिले में इस वर्ष पड़ी भीषण गर्मी और आंधी तूफान के बाद बेहतर मानसून होने की आशाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में शत प्रतिशत मानसूनी बारिश की संभावना में सिस्टम कमजोर जान पड़ रहा है। जिसके कारण आसमान में 24 घंटे काले बादलों की बनी उमड़-घूमड़ के बाद भी कम बारिश हो रही है। इससे खेतों में खरीफ की बुवाई का काम प्रभावित हो रहा है। खासकर धान की बुवाई या रोपणी भी मात्र 77 प्रतिशत तक ही हो सकी है। किसानों का कहना है कि अगर मौसम के यही हालात रहे तो किसान वर्तमान में किसी प्रकार सिंचाई कर धान की रोपाई कर लेंगे। लेकिन बाद में कम पानी की मात्रा में धान की पैदावार बेहतर नहीं हो सकेंगे। इसमें पानी के अभाव में धान की ब्रीडिंग कम होगी।

बारिश के आंकड़ों को देखा जाए तो पिछले दो माह के दौरान जिले में मात्र 490.5 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 106 मिमी औसत वर्षा कम है। 2 अगस्त की तक में वर्ष 2021 में जिलेभर में 601.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि 1 जून से 1 अगस्त 22 तक 529.8 मिमी औसत वर्षा दर्ज हैं।

अधीक्षक-भू-अभिलेख कार्यालय अधिकारी एसएस मिश्रा ने बताया कि चूंकि जून माह बारिश के आंकड़ा संग्रहण का शुरूआती महीना होता है, इसलिए पिछले वर्ष 1 जून 21 से 30 मई 22 तक जिले में 98.7 प्रतिशत बारिश हुई है। जिले में कुल 1290.6 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। जबकि जिले की सामान्य औसत बारिश की मात्रा 1306.5 मिमी है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से शुरूआती मानसून सक्रिय हुआ, उसके बाद पश्चिमी विक्षोप में कुछ दिनों तक बारिश के बाद वह सिस्टम कमजोर पड़ गया है। इससे किसानों को आगामी दिनों परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले वर्ष कुल वर्षा 4815.2 वर्तमान वर्ष में 3924.7 बारिश रहीं। जिले की औसत वर्षा गत वर्ष 601.9 वहीं अब तक इस वर्ष 490.5 मिमी दर्ज की गई।

1.84 लाख हेक्टेयर खरीफ के लक्ष्य में 77 फीसदी बुवाई, धान मात्र 71

इस वर्ष 1 लाख 84 हजार हेक्टेयर रकबा खरीफ के लिए लक्षित किया गया है। जिसमें धान 105.95 हजार हेक्टेयर, मक्का 14.72 हजार हेक्टेयर, ज्वार 200 हेक्टेयर, कोदो 20.15 हजार हेक्टेयर, उड़द 8.90 हजार हेक्टेयर, मूंग 120 हजार हेक्टेयर, अरहर 15.34 हजार हेक्टेयर, कुल्थी 500 हेक्टेयर, तिल 2.99 हजार हेक्टेयर, रामतिल 7.86 हजार हेक्टेयर, मूंगफली 1.30 हजार हेक्टेयर, और सोयाबीन 5.61 हजार हेक्टेयर हैं। जिसमें अब तक मात्र 77 फीसदी बुवाई का काम हो सका है। जबकि धान की रोपाई भी पानी के अभाव में 71 फीसदी ही हो पाई है।

उपसंचालक कृषि विभाग एनडी गुप्ता का कहना हैं कि मौसम का सिर्फ आंकलन किया जा सकता है, बारिश कम ही मात्रा में, लेकिन बरस रही है। किसान वर्षा के पानी के साथ जरूरत के अनुसार सिंचाई का भी सहारा लेकर धान की रोपाई कर रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/ राजेश शुक्ला

 

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