''वंदे मातरम'' शब्द नहीं आजादी का मंत्र है, भारत फिर से बनेगा अखंड : गिरिराज सिंह
बेगूसराय, 14 अगस्त (हि.स.)। आजादी के अमृत महोत्सव में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री
कार्यक्रम


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बेगूसराय, 14 अगस्त (हि.स.)। आजादी के अमृत महोत्सव में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने रविवार को बेगूसराय में सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के समक्ष ध्वजारोहण के बाद दस स्वतंत्रता सेनानी परिवार को सम्मानित किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत को फिर से विभाजित करने की साजिश चल रही है। लेकिन हम सब ऐसा नहीं होने देंगे और अखंड भारत का संकल्प पूरा किया जाएगा। वंदे मातरम शब्द नहीं, आजादी का मंत्र है। आज हम सबने सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के समक्ष ध्वजारोहण कर संकल्प लिया है कि 31 दिसंबर 1943 को नेताजी बोस ने पोर्ट ब्लेयर में जिस अखंड भारत का झंडा फहराया था, वह अखंड भारत बनने तक हम 14 अगस्त के दिन को काला दिवस के रूप में मनाते रहेंगे। पूर्वजों की कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी, हम आजादी से पहले वाला स्वतंत्र भारत बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि 1947 में सत्ता का हस्तांतरण हुआ, जिनके मन में प्रधानमंत्री बनने का सपना था, उसने बंटवारा करवाया। पूर्वज कुर्बानी दे रहे थे, त्याग-तपस्या कर रहे थे, दरिंदों से लड़ रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने कुर्सी के लिए धर्म के आधार पर भारत का विभाजन करवाया। 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना करके हमारे पूर्वजों के त्याग और बलिदान को खत्म करने, भारत को तोड़ने की साजिश की गई, जिसका परिणाम जिन्ना के रूप में 1947 में मिला। 1943 वाले अखंड भारत की कसम जब तक हम भारत को फिर से अखंड नहीं बनाएंगे, काला दिवस मनाते रहेंगे।

गिरिराज सिंह ने कहा कि देश को आजाद कराने में मुसलमानों का भी योगदान था, लेकिन उन्हें उंगली पर गिने चुने थे। महान कहलाने वाले नेता आजादी की लड़ाई में जिन्ना का साथ दे रहे थे, आज उनके वंशज और जिन्ना के वंशज चिल्ला रहे हैं कि भारत में मेरा हक है। आपने धर्म के आधार पर पूरी दुनिया में भारत को बदनाम करने की कोशिश किया, धर्म के आधार पर भारत का बंटवारा किया, हिंदू परिवार के बहन-बेटियों-युवाओं का शव ट्रेन में भर-भर कर भारत भेजा गया।

उस समय जो हिंदू पाकिस्तान में रह गए या गलती से चले गए, वह हिंदू बच नहीं पाए। पाकिस्तान में एक प्रतिशत भी हिन्दू बच नहीं पाए, कहां गए वह, या तो उनका धर्म परिवर्तन कराया गया या भाग गए। जबकि भारत में रहे मुसलमान 30 करोड़ हो गए, हमने विध्वंस नहीं किया। क्योंकि हमारे पूर्वजों ने मंत्र दिया था ''सर्वे भवंतू सुखिन: सर्वे संतु निरामया और वसुधैव कुटुंबकम्।'' पाकिस्तान में हमारे सारे मंदिर तोड़ दिए गए, यहां मस्जिदों की संख्या तीन सौ से बढ़कर तीन लाख से भी अधिक हो गई, हमने कोई एतराज नहीं जताया, लेकिन वह फिर से भारत को विभाजित करने की साजिश कर रहे हैं। आज हम देश के लिए शहादत देने वाले परिवार को सम्मानित कर रहे हैं, उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी, भारत का बच्चा-बच्चा अखंड भारत का संकल्प ले रहा है।

समारोह को संबोधित करते हुए विधायक कुंदन कुमार एवं सांसद प्रतिनिधि अमरेंद्र कुमार अमर ने कहा कि आज देशवासी विभाजन की विभीषिका को याद कर रहे हैं। हम भूत को याद करेंगे, तभी भविष्य बेहतर होगा। धर्म के आधार पर कांग्रेसियों ने देश का विभाजन किया, पाकिस्तान में हिंदुओं को खोज-खोज कर मारा गया और हिंदुओं का शव ट्रेन से हिंदुस्तान भेजा गया, उसमें बड़ी संख्या में बहनों-बेटियों के शव नग्न अवस्था में आया। कांग्रेसियों ने स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए शहादत को किताब से हटाकर सारी चरण वंदना एक परिवार और पार्टी के लिए किया। इसलिए आजादी के इस अमृत महोत्सव में हम बच्चों को बताएं कि आजादी कैसे मिली, इस आजादी को कैसे बचाना है। कार्यक्रम का संचालन सदर प्रखंड के बीडीओ सुदामा प्रसाद सिंह ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र

 

 rajesh pande