मृदा परिक्षण अभियान के लिए कृषि विभाग को 25.76 करोड़ के बजट का इंतजार
- 2019-20 के बाद नहीं चला मृदा परिक्षण अभियान लखनऊ, 13 अगस्त (हि.स.)। प्रदेश में मृदा परीक्षण के लि
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- 2019-20 के बाद नहीं चला मृदा परिक्षण अभियान

लखनऊ, 13 अगस्त (हि.स.)। प्रदेश में मृदा परीक्षण के लिए 25 करोड़ 76 लाख रुपये की दरकार है। इस बजट के लिए कृषि निदेशालय ने केन्द्र सरकार को भेजा है। उम्मीद है कि अगस्त माह में बजट आवंटित हो जाएगा। इसके बाद हर ब्लाक स्तर पर मिट्टी के सुक्ष्म तत्व व अन्य तत्वों की विस्तृत जांच की जा सकेगी। अभी 2019-20 के बाद प्रदेश में कोई विस्तृत मृदा परिक्षण अभियान नहीं चलाया गया है।

कृषि निदेशालय ने पूरे प्रदेश में ब्लाक स्तर तक मृदा परिक्षण का प्रथम चक्र 2015-16 में पहली बार चलाया था। वहीं चक्र 2016-17 में भी चलाया गया। दूसरा चक्र 2017-18 व 2018-19 में चला। इन दोनों चक्रों में ब्लाक वाइज सैंपल लिया गया और उसकी जांच की गयी। उसका विस्तृत ब्योरा कृषि विभाग के पास है। इसके बाद 2019-20 में जोत के हिसाब से मृदा का परिक्षण किया गया। 2020 के बाद परिक्षण नहीं हुआ। अभी तक कृषि विभाग उसी हिसाब से किसानों को उर्वरक डालने की सलाह देता है।

कृषि निदेशालय में सहायक निदेशक मृदा डाक्टर मनमोहन लाल बताते हैं कि 2020-21 में पूरे प्रदेश में माडल के रुप में वाराणसी के सेवापुरी के 28 हजार किसानों के मिट्टी की जांच की गयी थी। इसके बाद विभागीय जांच नहीं हुई। यह जरूर है कि किसान अपनी मिट्टी की जांच के लिए मिट्टी लाकर लैबों में जांच करवाते हैं और वे स्वयं अपने मिट्टी में मिलने वाले तत्वों के हिसाब से रासायनिक उर्वरक का प्रयोग करते हैं।

कृषि विभाग ने इस वर्ष मृदा परिक्षण के लिए केन्द्र सरकार से बजट मांगा गया है। यदि मांग किये गये 25.76 करोड़ रुपये का बजट आ गया तो प्रदेश के 822 ब्लाकों के मिट्टी का परिक्षण कर कृषि विभाग गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाएगा और किसानों को पोषक तत्वों की जानकारी देकर उसके अनुसार रासायनिक उर्वरक डालने की सलाह देगा।

अभी तक प्रदेश में 13 सरकारी लेबोरेटरिज हैं जहां मृदा परिक्षण होता है। वहां कृषक अपनी मिट्टी ले जाकर परीक्षण करा सकता है लेकिन पिछले दो साल से कृषि विभाग ने कोई मृदा परिक्षण अभियान नहीं चलाया है।

हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र

 

 rajesh pande