धमतरी-धान फसल से खरपतवार निकालने नहीं मिल रहे मजदूर
धमतरी, 12 अगस्त (हि.स.)।दो पूर्व हुई तेज वर्षा और गंगरेल बांध से छूटे सिंचाई पानी से खेतों की प्यास
धमतरी-धान फसल से खरपतवार निकालने नहीं मिल रहे मजदूर


धमतरी, 12 अगस्त (हि.स.)।दो पूर्व हुई तेज वर्षा और गंगरेल बांध से छूटे सिंचाई पानी से खेतों की प्यास बुझ गई है। खेत की मिट्टी गीली होने और पानी भरने के बाद किसान धान फसल की निंदाई कर खरपतवार निकाल रहे हैं। मजदूरों की किल्लत से निंदाई का काम प्रभावित हो रहा है। ऐसे में किसानों की परेशानी बढ़ गई है। मजदूर ढूंढने किसान आसपास के गांवों का चक्कर काट रहे हैं। समय पर निंदाई नहीं होने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

आषाढ़ और सावन माह में पर्याप्त बारिश नहीं होने से अंचल में सूखे की स्थिति निर्मित हो गई थी। बोता फसल लेने वाले किसानों की धान फसल सूखकर पीली हो गई थी और मरने लगी थी। खेतों में दरारें पड़ गई थी। इस बीच इन दिनों सावन माह के अंत में हुई बारिश से जमीन गीली होने से धान फसल में हरियाली लौट आई है। किसानों की टूटी उम्मीदें फिर जिंदा हो गई है। तेज धूप, भारी उमस और कम बारिश से खेतों में इस साल अधिक खरपतवार उग गए थे। इसे निकालने इन दिनों किसान-मजदूर खेतों में जुटे हुए हैं। एक साथ अधिकांश किसान खेतों की निंदाई करवा रहे हैं। ऐसे में मजदूरों की किल्लत शुरू हो गई है।

किसान ढेलू राम सिन्हा, नीलू ने बताया कि खेतों में खरपतवार है। बारिश होने के बाद अब वे अपने खेतों की निंदाई करा रहे हैं। लेकिन पर्याप्त संख्या में मजदूर नहीं मिलने के कारण समय पर काम नहीं हो पा रहा है। ऐसे में खेती-किसानी एक बार फिर से पिछड़ने की आशंका है। कृषक मित्र खिलेंद्र सिन्हा एवं ग्राम सेवक साहू सिन्हा का कहना है कि इस साल कम बारिश के चलते खरपतवार अधिक है। बारिश होने के बाद अब किसान खरपतवार निकाल रहे हैं।

150 से 200 तक रुपये तक मजदूरी

निंदाई के लिए मजदूरों को 150 से 200 रुपये तक मजदूरी दे रहे हैं। इसके बाद भी किल्लत बनी हुई है। मजदूर ढूंढने किसान आसपास के गांवों तक का चक्कर लगा रहे हैं। इसके बाद भी मजदूरों की कमी दूर नहीं हो पा रही है। कई गांव में तो 10 से 15 किलोमीटर तक मजदूर ट्रैक्टर में सवार होकर निंदाई के लिए दूसरे गांव से पहुंच रहे हैं। ऐसे में किसानों को 150 से दो 200 रुपये तक मजदूरी देनी पड़ रही है। इससे किसानी की लागत और बढ़ गई है।

हिन्दुस्थान समाचार/ रोशन सिन्हा

 

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