'कला वसुधा' के बाल रंगमंच प्रसंग का हुआ लोकार्पण
निशातगंज स्थित जेबीटीसी कैम्पस सभागार में हुआ समारोह लखनऊ, 02 जुलाई (हि.स.)। प्रदर्शकारी कलाओं की
‘कला वसुधा‘ के बाल रंगमंच प्रसंग का हुआ लोकार्पण


निशातगंज स्थित जेबीटीसी कैम्पस सभागार में हुआ समारोह

लखनऊ, 02 जुलाई (हि.स.)। प्रदर्शकारी कलाओं की त्रैमासिक पत्रिका ‘कला वसुधा‘ के बाल रंगमंच अंक का लोकार्पण शनिवार को एक समारोह में किया गया। मुख्य अतिथि निदेशक, बेसिक शिक्षा सर्वेन्द्र विक्रम, वरिष्ठ रंगकर्मी, सुल्तान अहमद रिज़वी, वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल सिन्हा, वरिष्ठ संगीतज्ञ केवल कुमार, बाल साहित्यकार डॉ ज़ाकिर अली रजनीश, पत्रिका के प्रधान सम्पादक अशोक बनर्जी व सम्पादक डॉक्टर ऊषा बनर्जी ने पत्रिका का लोकार्पण किया। समारोह का अयोजन नाट्य संस्था निसर्ग की ओर से लखनऊ के निशातगंज स्थित जेबीटीसी कैम्पस के एससीईआरटी सभागार में हुआ।

वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल सिन्हा ने सम्पादक ऊषा बनर्जी और अशोक बनर्जी प्रशंसा करते हुए कला वसुधा के उत्कृष्ट प्रकाशन की बधाई दी। बताया कि बाल रंगमंच के वर्तमान दौर में कला वसुधा का यह बाल रंगमंच विशेषांक अत्यन्त महत्वपूर्ण है। वरिष्ठ संगीतकार केवल कुमार ने कहा कि अशोक बनर्जी और ऊषा बनर्जी अछूते विषय को छूते हैं, फिर उस विषय की गहराई में जाकर अनमोल मोती निकाल लाते हैं। सुल्तान अहमद रिज़वी साहब ने कहा कि बाल साहित्य की रचना करना बहुत ही कठिन कार्य है और उससे भी कठिन कार्य है बाल रंगमंच। कला वसुधा ने इतने कठिन कार्य में अपना अतुलनीय योगदान दिया है और बाल रंगमंच प्रसंग के प्रकाशन के लिए अशोक बनर्जी जी और डॉक्टर ऊषा बनर्जी की यह कहते हुए विशेष प्रशंसा की कि इस बाल रंगमंच प्रसंग के द्वारा बाल साहित्य और बाल नाट्य परम्परा को जोड़ने का महती कार्य किया गया है।

बाल नाटक साहित्य के विशेषज्ञ डॉक्टर हेमन्त कुमार ने कहा कि एक लंबे काल के सन्नाटे के बाद बाल रंगमंच प्रसंग के द्वारा सन्नाटा तोड़ने का प्रयास किया गया है। निदेशक बेसिक शिक्षा सुरेंद्र विक्रम ने कहा कि कला वसुधा के निरन्तर उत्कृष्ट प्रकाशन के पीछे अशोक बनर्जी की लगनशीलता, जीवट और कर्मठता है। बाल रंगमंच प्रसंग भी इसी का परिणाम है। इस अंक के द्वारा बाल रंगमंच और शिक्षा के बीच कई उपयोगी रास्ते खुल सकते हैं।

आखिर में सम्पादक डॉक्टर ऊषा बनर्जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। यह आश्वासन दिया कि कला वसुधा अपनी सोच और मूल्यों के अनुसार निरन्तर काम करती रहेगी। साथ ही साथ सभी प्रबुद्ध जनों के आशीर्वाद को भी आवश्यक बताया। सम्पादक ने निसर्ग संस्था के अध्यक्ष अध्यक्ष ललित सिंह पोखरिया और सभी कलाकारों का भी आभार व्यक्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार/शैलेंद्र


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