जिले में रेतुआ, कनकई, महानंदा सहित सभी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ कटाव जारी
किशनगंज,23 जून (हि.स.)। जिले में रेतुआ, कनकई, महानंदा सहित लगभग सभी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के
जिले में रेतुआ, कनकई, महानंदा लगभग सभी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ कटाव जारी।


किशनगंज,23 जून (हि.स.)। जिले में रेतुआ, कनकई, महानंदा सहित लगभग सभी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ कटाव जारी है। लोग कटाव से बचने के लिए अपना आशियाना उजार सुरक्षित ठिकाने की ओर रूख कर रहे हैं। कईयों का आशियाना अभी से ही नदी के गर्भ में समाने लगा है।

टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत स्थित रेतुआ नदी के जलस्तर में कमी आने के कारण सुहिया गांव कटाव के जद में है। लोगों की रातों की नींद गायब है। पूर्व वार्ड सदस्य लाखों देवी का घर रेतुआ नदी के गर्भ में समा चुका है। जिससे यहां के पीड़ित परिवार कटावरोधी कार्य नहीं होने को लेकर आक्रोशित हैं।

गौरतलब है कि मानसून प्रवेश के साथ ही क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। खासकर निसन्द्रा, दुर्गापुर बनगामा, लौचा, महेशबथना, भाटाबाड़ी सहित झींगाकाटा पंचायत प्रतिवर्ष बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। इस कारण प्रतिवर्ष लोगो को बाढ़ के समय सड़क कटाव के कारण प्रखंड कार्यालय से लोगों का संपर्क भी टूट जाता है।

इस संबंध में समाजसेवी चरकपाड़ा लौचा के मो असलम ने बताया कि नेपाल के तराई क्षेत्र एवं क्षेत्र में प्रतिदिन हो रही बारिश से आने वाले दिनों में परेशानी बढ़ सकती है। वर्तमान समय बहादुरगंज टेढ़ागाछ सीमा पर बहने वाली कनकई नदी तेज बहाव से मालीटोला मटियारी में नदी कटाव जारी है, जो चिंता का विषय है। इसके लिए क्षेत्र के लोगों के साथ प्रशासनिक स्तर पर सचेत रहने की आवश्यकता है। ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी संकट का सामना किया जा सके।

सीओ अजय कुमार ने बताया कि अभी तक बहादुरगंज प्रखंड होकर गुजरने वाली किसी भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार नहीं किया है। लगातार बारिश से निश्चित रूप से हर नदी नाला भर चुका है। प्रशासनिक स्तर पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी जारी है। ताकि लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो। उन्होंने बताया कि बाढ़ आने की स्थिति पर लोगों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए पहले से ही प्रशासनिक स्तर से सुरक्षित स्थान को चिह्नित किया जा चुका है। वहीं जरूरत पड़ने पर सामूहिक रसोई की भी व्यवस्था की जाएगी।

कनकई नदी में वर्षा का पानी और नेपाल से छोड़े गए पानी को लेकर सभी नदियों का जलस्तर काफी बढ़ चुका है। इस कारण निचले इलाके में बसे हुए ग्रामीणों के सिर पर बाढ़ का खतरा फिर से मंडराने लगा है। ऐसे में पलसा नदी, पत्थरघट्टी नदी गंधर्वडांगा नदियों में पानी भर जाने से वहां के ग्रामीण काफी परेशान हो चुके हैं। लोग प्रशासन से कटावरोधी कार्य व जल निकासी का रास्ता ढूंढने के लिए अपील कर रहे हैं। वैसे तो वर्षों पहले टूटी सड़कें अबतक बहाल नहीं हो पाई है। सूखा होने के कारण लोग किसी तरह आवागमन कर लेते थे, लेकिन अभी बारिश हो जाने से उन रास्तों में पानी भर गया है। इससे लोगों का घरों में दुबकना मजबूरी हो गया है। हरूवाडांगा बाजार से हारीभिट्ठा जाने वाली सड़क बरसात के दिनों में मस्जिद टोला के पास निर्माणाधीन पुल टूट गयी थी, जो अबतक बहाल नहीं हो पाई है। इस कारण राहगीरों सहित नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों को भी काफी दिक्कत हो रही है।

जानकारी के अनुसार सिघिमारी सहित नेपाल की सीमा का अंतिम छोड़ पलसा घाट तक जाने वाली सड़क में एक कलवर्ट जो हरूवाडांगा मस्जिद टोला के पास पिछले बरसात में टूट गया था, जो अबतक नहीं बना है जिससे लोगों का आवागमन बिल्कुल बाधित हो चुका है। करीब हजारों की संख्या वाले गांव के लोगों को जाने के लिए पक्की सड़क तो बना दी गई, लेकिन कलवर्ट के टूटने के कारण हजारों जनसंख्या वाले लोग किसी काम का नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है तो गांव के लोग नदी के दोनों किनारे खंभे में मोटी रस्सी बांधकर फिर खाली ड्राम और उसके ऊपर बांस की छपरी से बने देशी जुगाड़ के नाव से नदी पार कर रोजी-रोटी के लिए गांव से निकलते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/धर्मेन्द्र


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