50 सालों से कब्जा किए गए भूखंड पर चल रहा था होटल व्यवसाय
कोटा, 25 मई (हि.स.)। शहर के पॉश कॉलोनी में पिछले 50 सालों से बिना पट्टे के भूखंड पर बनी नवरंग होटल व
50 सालों से कब्जा किए गए भूखंड पर चल रहा था होटल व्यवसाय


कोटा, 25 मई (हि.स.)। शहर के पॉश कॉलोनी में पिछले 50 सालों से बिना पट्टे के भूखंड पर बनी नवरंग होटल विवादों में आ गई है। पट्टे के लिए कोटा उत्तम नगर निगम में आवेदन के बाद मामले का खुलासा होने पर कोटा उत्तर के पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने इस पर आपत्ति जताते हुए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। साथ ही निगम अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी प्रभावी नेता के दबाव में आकर असंवैधानिक तरीके से अतिक्रमण उक्त भूमि का पट्टा जारी किया तो इसका खामियाजा भाजपा शासन में प्रत्येक अधिकारी को उठाना पड़ेगा। इसके बाद से ही निगम प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।

दरअसल सिविल लाइन कलेक्ट्रेट चौराहे स्थित भूखंड संख्या 7 पर बने नवरंग होटल के पट्टे को लेकर कोटा उत्तर नगर निगम में आवेदक द्वारा सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन किया गया था। जिस पर निगम प्रशासन की ओर से 12 मई को अखबारों में आपत्ती सूचना जारी की गई थी। मामला संज्ञान में आने के बाद पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजल ने इस पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस सरकार के मंत्री शांति धारीवाल व निगम प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया।

पक्ष और विपक्ष के मुद्दे:

पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल का कहना है कि 1950 से 55 के दशक में यूआईटी से पहले इंप्रूवमेंट ट्रस्ट यानी सीआईटी द्वारा पट्टे जारी किए जाते थे। जिसमें सुनियोजित तरीके से प्लानिंग काटकर लॉटरी के माध्यम से भूखंड आवंटित कर उसके पट्टे दिए जाते थे। इसी कॉलोनी के कॉर्नर के एक भूखंड पर तत्कालीन समय में रिखब धारीवाल द्वारा भूखंड पर कब्जा किया गया और यह जगह आज शहर के पॉश कॉलोनी में तब्दील हो चुकी है। जहां पर नवरंग होटल स्थापित है। जिसकी अनुमानित कीमत वर्तमान में 100 करोड़ से अधिक है। सरकार में कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल अपने मां की वसीयत के आधार पर इस जमीन के लिए पट्टा मांग रहे हैं। जबकि यह भूखंड में ग्रांट एक्ट व 69ए के तहत नहीं आता इस भूखंड का पट्टा जारी करना अवैध है।

सरकार द्वारा प्रशासन शहर के संग अभियान के तहत शहर में बसी बस्तियों नियोजित कॉलोनी हो को पट्टा दिया जा रहा है। इसी के तहत प्रक्रिया शुरू मंत्री शांति धारीवाल ने भी सिविल लाइन स्थित भूखंड संख्या 7 के लिए पट्टे के लिए आवेदन किया।

इस संबंध में आज से पहले सीआईटी सिटी इंप्रूव ट्रस्ट की जानकारी बहुत ही कम लोगों तक थी। शहर की अधिकतर जनता आज यूआईटी या नगर निगम को जानती है। जहां पर पट्टे के लिए आवेदन किया जा सकता है। इसकी जानकारी पूर्व में सरकार का हिस्सा रह चुके विपक्षी को नेताओं को भी नहीं था और आज आवेदन के बाद कानूनी दांव पर और इसमें खामियां निकालने के रास्ते तलाश किए जा रहे हैं।

सवाल उठे कई:

सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर नियुक्त शांति धारीवाल अपने कार्यकाल के दौरान सरकार सरकार का अहम हिस्सा रहा चुके है, और कई बार चुनाव जीतकर कई बड़े पदों जिम्मेदारी निभा चुके है। यदि वह चाहते तो किसी को भनक लगे बिना ही भूखंड का पट्टा जारी करवा सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा ना करके एक प्रक्रिया के तहत निगम में पट्टे के लिए आवेदन किया है। जिससे उनके ऊपर उंगली उठाना विपक्ष की बोल साबित हो सकती है।

पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने उन्हें कटघरे में खड़े करते हुए आरोप लगाया कि पिता ने भूखंड पर कब्जा किया और मां की वसीयत के आधार पर बेटा उसको लीगल रूप देने के लिए पट्टा मांग रहे हैं। मंत्री धारीवाल के अपनी गलती स्वीकार करते हुए उक्त भूखंड से अतिक्रमण छोड़कर उसे सरकार को सौंप एक मिसाल जनता के सामने कायम करनी चाहिए।

भूखंड को लेकर 1 आवेदन प्राप्त हुआ इस संबंध में आयुक्त स्तर पर इसकी जांच की जा रही है प्रक्रिया के तहत आगे जो भी स्थिति होगी उसे अवगत करवाया जाएगा।

वासुदेव मालावत, आयुक्त कोटा उत्तर नगर निगम

हिन्दुस्थान समाचार/राकेश शर्मा


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