चीन को लेकर भारत अपनी नीति को पूरी तरह से बदले: शान्ता कुमार
पालमपुर, 24 मई (हि.स.)। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शान्ता कुमार ने कहा है कि भारत के लिए चीन बहुत ब
चीन के सम्बंध में भारत अपनी नीति को पूरी तरह बदले : शान्ता कुमार


पालमपुर, 24 मई (हि.स.)। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शान्ता कुमार ने कहा है कि भारत के लिए चीन बहुत बड़ा संकट बनता जा रहा है। अब अफगानिस्तान में तालिबान और उनके साथ चीन व पाकिस्तान से संकट और भी बढ़ गया है।

उन्होंने कहा कि नेहरू के समय चीन से दोस्ती करने का बड़ा प्रयत्न हुआ। भारत पंचशील और हिन्दी-चीनी भाई-भाई के नारे लगाता रहा और चीन चुपचाप भारत की धरती अक्साई चिन में सड़क बनाता रहा। भारत को पता तब लगा, जब चीन ने उस सड़क का उदघाटन किया। उन्होंने कहा कि भारत के सारे प्रयत्नों के बाद भी 1962 में चीन ने आक्रमण करके बहुत बड़ा विश्वासघात कर चुका है। भारत की नई सरकार ने कुछ सालों से चीन के साथ सम्बंध सुधारने की कोशिश की परन्तु चीन धीरे धीरे लददाख में अपना अधिकार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पैंगाग झील पर दूसरा पुल बना रहा है।

शान्ता कुमार ने कहा कि चीन के सम्बंध में भारत को अपनी नीति को पूरी तरह से बदल देना चाहिए। भारत के लिए सबसे बड़ा संकट चीन है। विश्व के बहुत से देश तिब्बत की सहायता करना चाहते है और इस विषय पर चीन को घेरना चाहते है। भारत उनका सहयोग करे। तिब्बत में मानवीय अधिकारों का हनन हो रहा है, धार्मिक स्वाययता नही है। अब भारत को पहल करके इन प्रश्नों को राष्ट्र संघ में उठाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दलाई लामा इस समय विश्व में सबसे अधिक सम्मानीय धार्मिक नेता है। विश्व का सबसे बड़ा सम्मान नोबेल पुरस्कार उन्हें मिला है। मैं लोकसभा सर्वदलीय तिब्बत मंच का कई साल तक अध्यक्ष रहा। मंच ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके दलााई लामा को भारत रत्न देने की मांग की थी। उस प्रस्ताव पर देश की सभी पार्टियों के 265 सांसदों ने हस्ताक्षर किये थे। आज की परिस्थिति में यह आश्यक है कि भारत दलाई लामा को भारत रत्न से सम्मानित करें।

शान्ता कुमार ने कहा कि चीन इतिहास से विस्तारवादी रहा है। 1962 से लेकर भारत की धरती को हथिया है। अधिकारियों की लम्बी बातचीत के बाद भी लददाख में अपना अवैध निर्माण करता जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में भारत सरकार को भी चीन के प्रति अपनी नीति में बदलाव करना चाहिए। इस दृष्टि से जापान में हो रहा क्वाड सम्मेलन महत्वपूर्ण प्रयास है।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनील


 rajesh pande