आपसू ने एनसीएम के सदस्य की अरुणाचल में चकमा, हाजोंग क्षेत्रों की यात्रा और बयानों का किया विरोध
इटानगर, 20 मई (हि.स.)। ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (आपसू) ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसी
आपसू ने एनसीएम के सदस्य की अरुणाचल में चकमा, हाजोंग क्षेत्रों की यात्रा और बयानों का किया विरोध


इटानगर, 20 मई (हि.स.)। ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (आपसू) ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के सदस्य रिनचेन ल्हामो की अरुणाचल प्रदेश में बसे सिर्फ चकमा, हाजोंग क्षेत्रों की यात्रा का कड़ा विरोध करते हुए इसे एक विभाजनकारी यात्रा करार दिया है।

एनसीएम के सदस्य रिनचेन ल्हामो हाल ही में ईस्ट अरुणाचल प्रदेश दौरा करते हुए राज्य में बसे चकमा, हाजोंग शरणार्थियों से मुलाकात की।

आपसू ने कहा कि अपनी यात्रा के दौरान शरणार्थियों के लिए भारतीय नागरिक के बराबर अधिकार देने की उनकी वकालत अनुचित और उनके द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले प्रतिष्ठित संगठन को कमजोर करती है। एक संवैधानिक पद पर आसीन उनके कद के एक सदस्य को सबसे पहले राज्य में प्रचलित कानूनों से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए जो स्वदेशी अधिकारों की रक्षा और सुरक्षा करता है। उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि राज्य में रह रहे शरणार्थियों का विरोध हो रहा है।

छात्र संस्था ने कहा है कि एनसीएम के सदस्य के रूप में ल्हामो को अपने आधिकारिक आचरण में निष्पक्ष होना चाहिए और अस्थायी बसने वालों और हमारे संविधान में निहित भारतीय नागरिक के अधिकारों के बीच अंतर करने में सक्षम होना चाहिए।

अरुणाचल प्रदेश के संघ और स्वदेशी लोग हमेशा केंद्र से आने वाले किसी भी केंद्रीय नेता या आयोग के सदस्यों का स्वागत करते हैं, लेकिन हमारी गरिमा और गौरव के साथ समझौता नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक कार्ड के तहत धार्मिक हित के साथ कुछ समूहों को खुश करने के लिए किया गया कोई भी प्रयास, जैसा कि उनके भाषण में देखा गया है, राज्य के स्थानीय लोगों के विरूद्ध है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आपसू ने कहा कि ल्हामो को जानना चाहिए कि अरुणाचल प्रदेश 100 प्रतिशत आदिवासी बहुल राज्य है और उनकी पहली यात्रा समावेशी होनी चाहिए। जो कुछ समूहों और धार्मिक अनुयायियों को अलग करने की बजाय सभी वर्गों की आशा और आकांक्षाओं को पूरा करना चाहिए।

हिन्दस्थान समाचार /तागू/ अरविंद


 rajesh pande