भारत-जर्मनी के बीच हरित व सतत ऊर्जा साझेदारी, मोदी-शोल्ज ने किया समझौता
भारत और जर्मनी के बीच हरित व सतत ऊर्जा के बीच साझेदारी बढ़ाने का फैसला हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जर्मनी यात्रा के दौरान जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किये।

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-जर्मनी पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का भारतीयों ने किया जोरदार स्वागत
-जर्मनी के चांसलर ने दिया जी-7 सम्मेलन में शामिल होने का न्यौता
-दोनों देशों ने लिया हरित हाइड्रोजन कार्यबल स्थापना का फैसला
 
बर्लिन, 02 मई (हि.स.)। भारत और जर्मनी के बीच हरित व सतत ऊर्जा के बीच साझेदारी बढ़ाने का फैसला हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जर्मनी यात्रा के दौरान जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किये। जर्मनी के चांसलर ने भारतीय प्रधानमंत्री को जी-7 सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया।
 
प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर शोल्ज ने द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों के हितों व रिश्तों को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण आयामों की समीक्षा की, जिसमें कारोबार को गति देने और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल रहे। बाद में पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत और जर्मनी ने हरित हाइड्रोजन कार्यबल स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता वार्ता में त्वरित प्रगति के लिए भी भारत को प्रतिबद्ध बाया।
 
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव डाला है। हाल की जियो पॉलेटिकल घटनाओं ने भी दिखाया कि विश्व की शांति और स्थिरता कितनी नाजुक स्थिति में है और सभी देश एक-दूसरे से कितना अधिक जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देशों के तौर पर भारत और जर्मनी कई मूल्यों को साझा करते हैं। इन साझा मूल्यों और साझा हितों के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में हमारे द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
 
शोल्ज के जर्मनी का चांसलर बनने के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी पहली मुलाकात थी। प्रधानमंत्री मोदी भी 2022 में पहले विदेश दौरे पर गए हैं। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहली यात्रा पर यहां आने से समझा जा सकता है कि भारत यूरोप को कितनी प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कहा कि यूक्रेन के संकट की शुरुआत से ही हम युद्धविराम का आह्वान कर रहे हैं। विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत ही एकमात्र उपाय है। इस युद्ध में सभी को नुकसान होगा, कोई जीतेगा नहीं। इसलिए हम शांति के पक्ष में हैं। यूक्रेन संकट में उथल-पुथल के कारण तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। दुनिया में फर्टिलाइजर की कमी हो रही है। इससे विकासशील और गरीब देशों पर बुरा असर होगा। इस संघर्ष के मानवीय प्रभाव से भारत बहुत चिंतित है। भारत ने यूक्रेन को मानवीय सहायता भी भेजी है।
 
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी के जर्मनी पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। जोरदार ढंग से भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे लगने लगे। बच्चे और महिलाएं तक, सभी प्रधानमंत्री मोदी की एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने भी सभी का अभिवादन स्वीकार किया। वे इस दौरान एक बच्चे से भी मिले जिसने प्रधानमंत्री को गाना गाकर सुनाया।
 
हिन्दुस्थान समाचार /संजीव मिश्र

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