राजस्थान से निर्यात बढ़ाने के लिए ईपीसीएच ने बजट से पहले दिए सुझाव
जयपुर, 16 फ़रवरी (हि.स.)। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के महानिदेशक डॉ. राकेश कुमार ने
राजस्थान से निर्यात बढ़ाने के लिए ईपीसीएच ने बजट से पहले दिए सुझाव


जयपुर, 16 फ़रवरी (हि.स.)। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के महानिदेशक डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि राजस्थान में हस्तशिल्प के निर्यात और इसके जरिए रोजगार पैदा करने की अपार संभावनाएं हैं। हम राजस्थान के हस्तशिल्प क्षेत्र के समग्र विकास और विकास के लिए आगामी बजट में घोषित आवश्यक पहलों के माध्यम से समर्थन की उम्मीद करते हैं। उन्होंने बजट से पहले निर्यात बढ़ाने के लिए उपयोगी सुझाव दिए हैं।

उन्होंने बताया कि राजस्थान देश के प्रमुख हस्तशिल्प निर्यातक राज्यों में से एक है, जो लगभग आठ हजार करोड़ रुपये (हस्तशिल्प के कुल निर्यात का 30 प्रतिशत) और अपनी पारंपरिक और रंगीन कला के लिए जाना जाता है। ब्लॉक प्रिंट, टाई एंड डाई प्रिंट, बगरू प्रिंट, सेंगर प्रिंट, जरी कढ़ाई, हस्तशिल्प वस्तुएं, लकड़ी के फर्नीचर, कालीन, नीली मिट्टी के बर्तन कुछ ऐसे आइटम हैं जो दुनिया भर के खरीदारों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) ने राजस्थान के हस्तशिल्प क्षेत्र के समग्र विकास और प्रोत्साहन के लिए राज्य बजट में कुछ उपायों पर विचार करने का प्रस्ताव दिया है।

उन्होंने बताया कि सुझावों में देश में आयोजित होने वाले वास्तविक, भौतिक और आभासी दोनों ही तरह के अंतरराष्ट्रीय मेलों के लिए वित्तीय सहायता, कंटेनरों की कमी से उत्पन्न चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए माल ढुलाई सब्सिडी, हस्तशिल्प क्षेत्रों के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड कन्वर्जन) की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और नई इकाइयों की स्थापना और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए इसे ऑटो मोड में बनाया जाए। इसके अलावा, आवेदक द्वारा परिवर्तन के लिए आवेदन की गई कुल भूमि का 5 प्रतिशत जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को सौंपने की शर्त से भी मुक्ति दी जानी चाहिए। विदेशी खरीदारों को नमूने भेजने के लिए माल ढुलाई और कूरियर शुल्क के लिए सब्सिडी, आवश्यक अनुपालन जैसे वृक्ष (वीआआईकेएसएच), आरओएचएस, रीच (आरईएसीएच), सीटी-पैट (पीएटी) या अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कोई अन्य प्रासंगिक कंप्लायंस हासिल करने के लिए वित्तीय सहायता, सीएफ़सी, परीक्षण प्रयोगशालाएं और कच्चा माल बैंक स्थापित करने के लिए सहायता, प्रत्येक जिले में शिल्प के समग्र विकास के लिए एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) शुरू किया जाएगा, जिससे उस जिले को एक प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में परिवर्तित किया जा सके। निर्यात करने वाली इकाइयों को बिजली की रियायती दरें और निर्यातक इकाइयों में सौर ऊर्जा स्थापित करने के लिए सब्सिडी, रिप्स (आरआईपीएस) 2019 लघु वन उत्पाद सूची के तहत बबूल, शीशम और आम की लकड़ी को शामिल करना, पर्यटन स्थलों पर "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" या "पारंपरिक कला संग्रहालय" की स्थापना भी इन सुझावों में शामिल है।

ईपीसीएच उपाध्यक्ष दिलीप बैद ने कहा कि इससे राज्य से उत्पादन और निर्यात में भारी उछाल का मार्ग प्रशस्त होगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान हस्तशिल्प निर्यात 25,679.98 करोड़ रुपये (3459.75 मिलियन डॉलर) था, जिसमें बीते वर्ष की इसी अवधि की तुलना में रुपये के संदर्भ में 1.62 प्रतिशत की आंशिक वृद्धि दर्ज की गई है।

हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर


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