संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने की है सख्त आवश्यकता
जम्मू, 30 नवंबर (हि.स.)। बुधवार को श्रीकैलख ज्योतिष एवं वैदिक ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री
संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने की है सख्त आवश्यकता


जम्मू, 30 नवंबर (हि.स.)। बुधवार को श्रीकैलख ज्योतिष एवं वैदिक ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ने देववाणी संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए रोहित कंसल (आईएएस) प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग,केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर से मुलाकात कर उन्हें 'धर्मस्थली' पुस्तक भेंट की और ज्ञापन सौंपा। उन्होंने प्रमुख सचिव से आग्रह किया कि जम्मू कश्मीर में नए डिग्री कॉलेज खुले हैं। वहा देववाणी संस्कृत को पढ़ाया जाए और उच्चशिक्षा में वैदिक स्टडीज पदों को भरा जाये।

शास्त्री ने कहा कि देववाणी संस्कृत को भी अन्य भाषाओं की तरह विशिष्ट दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर की भूमि शैव दर्शन का सनातन केंद्र रही है। इसी पावन पवित्र भूमि पर प्रत्यभिज्ञादर्शन के संस्थापक आचार्य अभिनवगुप्त, महाकवि कल्हण, महाकवि विल्हण, एवं अनेक प्राचीन संस्कृत मनीषियों का उद्भव हुआ है। जिन आचार्यों ने अपने कर्मरूपी तप से न केवल भारतवर्ष को अपितु संपूर्ण विश्व को एकता के सूत्र में पिरोने का मार्गप्रशस्त किया था, वही पुण्यसलिला जम्मू-कश्मीर वसुंधरा आज संस्कृत से विलुप्त होती जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि उनकी मांगों को पूरा करने की सख्त आवश्यकता है। इससे संस्कृत सेवियों का मनोबल बढ़ेगा और ऐसे प्रयासों से प्रदेश में विलुप्त हुए संस्कृत धर्म -दर्शन की पुनर्प्रतिष्ठा सम्भव है।

हिन्दुस्थान समाचार/राहुल/बलवान