टंट्या मामा और बिरसा मुंडा अंग्रेजों से लड़ने वाले देश के पहले आदिवासी जननायकः कुलस्ते
खरगोन, 30 नवंबर (हि.स.)। केन्द्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते बुधवार को
टंट्या मामा और बिरसा मुंडा अंग्रेजों से लड़ने वाले देश के पहले आदिवासी जननायकः कुलस्ते


खरगोन, 30 नवंबर (हि.स.)। केन्द्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते बुधवार को झिरन्या के एक दिवासीय भ्रमण पर रहे। कुलस्ते यहां क्रांतिवीर जननायक टंट्या भील गौरव यात्रा के संबंध में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में पेसा एक्ट के संबंध में नागरिकों को जानकारी दी गई। इस दौरान उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि टंट्या मामा भील और बिरसा मुंडा भारत के लिए पहले आदिवासी नेता थे, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।

केन्द्रीय मंत्री कुलस्ते ने कहा कि जल, जंगल और जमीन का जो अधिकार है। इन अधिकारों को दिलाने के लिए इन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ एक आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने रानी दुर्गावती, शंकरशाह, रघुनाथशाह, भीमा नायक का उल्लेख करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति में यही जनजातीय समाज व आदिवासी समाज के नेता थे जिन्होंने अग्रेजों के खिलाफ आजादी के लिए आंदोलन किया था।

उन्होंने कहा कि पहली बार भारत के इतिहास में आदिवासी समाज के ऐसे महापुरूष जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। महात्मा गांधी ने इस आंदोलन को प्रारंभ किया। किंतु इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले आदिवासी समाज के जिन नामों को उल्लेख ऐसे महापुरूष इस भारत के अंदर हुए। दूर्भाग्य से आज इन महापुरुषों के बारे में देश के अंदर किसी ने भी इनका जिक्र नहीं किया।

कुलस्ते ने कहा कि आज मुझे प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महापुरुषों के इतिहास को जानने का अवसर दिया। ताकि हमारे आदिवासी समाज और मप्र के लोगों को इन महापुरूषों के बारे में जानकारी हो सके।

मंत्री कुलस्ते द्वारा टंट्या मामा के वंशजों का भी फूल मालाओं से सम्मानित किया। इस दौरान राज्यसभा सांसद सुमेरसिंह सोलंकी, खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, पूर्व विधायक धुलसिंह डावर, झिरन्या जनपद अध्यक्ष संगीता नार्वे, राजेन्द्र सिंह राठौड़ सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश