धमतरी जिले में अब तक एचआईवी से 115 लोगों की हो चुकी है मौत
मरीजों में मजदूर वर्ग तथा वाहन चालक ज्यादा संक्रमित आज विश्व एड्स दिवस धमतरी, 30 नवंबर (हि.स.)। तम
धमतरी जिले में अब तक एचआईवी से 115 लोगों की हो चुकी है मौत


मरीजों में मजदूर वर्ग तथा वाहन चालक ज्यादा संक्रमित

आज विश्व एड्स दिवस

धमतरी, 30 नवंबर (हि.स.)। तमाम प्रचार-प्रसार के बावजूद एड्स की रोकथाम में कोई कमी नहीं आई है। उल्टे यह बीमारी बड़ी तेजी के साथ फैल रही है। आमतौर पर बड़े शहरों और महानगरों तक सीमित एड्स का रोग धमतरी में भी पैर पसार चुका है। धमतरी में औसतन हर महीने एक एचआईवी पॉजिटिव मरीज मिल रहा है।

जिला अस्पताल एवं निजी नर्सिंग होम से मिली जानकारी के अनुसार अलग-अलग आंकड़ों पर गौर करें तो हर दिन धमतरी में 50 से 60 लोग एड्स के बारे में पूछताछ करने पहुंचते हैं। इनमें से लगभग 10 -15 लोग अपनी जांच भी करवाते हैं। जांच में एक मरीज एचआईवी पाजिटिव जरूर मिलता ही है। बुधवार को एड्स परामर्श केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार एड्स जैसी लाइलाज बीमारी को लेकर लोगों में जागरुकता तो है, फिर भी सतर्क नहीं हो रहे। एड्स परामर्श केंद्र आने वाले सालों में शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ज्यादा होते हैं। धमतरी के लोग जांच पड़ताल के लिए दूसरे शहर में जाते हैं। हर साल मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। यहां एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की केवल पहचान की जाती है, उनका इलाज रायपुर में होता है।

स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार अब तक 300 से अधिक मरीज एचआईवी पाजिटिव पाए गए। जिसमें से पुरुष, महिला, गर्भवती और ट्रांसजेंडर शामिल हैं। जानकारी के अनुसार धमतरी में सन 2014 में 10 मरीज थे, जो सन 2015 में बढ़कर 24 हो गए। सन 2016 में 27, सन 2017 में 26, और 2018 जनवरी से अब तक 11पाजिटिव मिले थे। सन 2014 के पूर्व से लेकर अब तक 115 मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं कई मरीजों का उपचार जारी है।

क्या है एचआईवी एड्स

एचआईवी -ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस । उस वायरस या विषाणु को कहते हैं जो इंसानों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। जिन व्यक्तियों के शरीर में यह विषाणु होता है, उन्हें एचआईवी पाजिटिव कहा जाता है। अभी तक इस बीमारी को मारने की कोई दवा नहीं मिली पर शोध जारी है।

किया जाता है प्रचार-प्रसार

धमतरी सीएचएमओ डाॅ. शैलेंद्र कुमार मंडल ने बताया कि एड्स के बचाव के लिए लगातार प्रचार-प्रसार किया जाता है। इसके लिए इस सामुदायिक सदस्यों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही पंपलेट, बैनर, पोस्टर,रक्तदान शिविर, गोष्ठी के माध्यम से भी लोगों तक इस बीमारी के बचाव के संबंध में प्रचार-प्रसार जारी है। इसके अलावा ब्लॉकस्तर पर नियुक्त काउंसलर भी लोगों को जागरूक करते हैं। सभी जगह जहां सुविधा उपलब्ध है। बीमारी से बचाव के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद भी ली जाती है।

हिन्दुस्थान समाचार/ रोशन सिन्हा