चंपारण में किसानो की स्थिति बदहाल,समर्थन मूल्य पर अनाज नही हो रही खरीद:प्रशांत किशोर
मोतिहारी,30नवंबर(हि.स.)।जन सुराज पदयात्रा के 60वें दिन प्रशांत किशोर जिले के रक्सौल प्रखंड के नोनिया
जन सुराज पदयात्रा के दौरान लोगो को संबोधित करते पीके


जन सुराज पदयात्रा के दौरान लोगो को संबोधित करते पीके


जन सुराज पदयात्रा के दौरान लोगो को संबोधित करते पीके


मोतिहारी,30नवंबर(हि.स.)।जन सुराज पदयात्रा के 60वें दिन प्रशांत किशोर जिले के रक्सौल प्रखंड के नोनियाडीह पहुंचे जहां उन्होने मीडिया से बात करते कहा कि अबतक जन सुराज पदयात्रा के दौरान वे लगभग 650 किमी से अधिक पैदल चल चुके हैं। इसमें 500 किमी से अधिक पश्चिम चंपारण में पदयात्रा हुई और पूर्वी चंपारण में अबतक 100 किमी से अधिक पैदल चल चुके हैं। इस दौरान जमीन पर हुए अनुभवों और समस्यायों देखते हुए यही कह सकता हूं कि बिहार में शिक्षा,कृषि,स्वास्थ सहित सभी मूलभुत बुनियादी जरूरत बदहाल है।यहां कृषि और किसानों की स्थिति बदहाल है।

उन्होने कहा सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति कृषि क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की हैं। कुछ राज्यों के आंकड़ों की तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि केरल में मजदूरों को 700 प्रतिदिन की मजदूरी मिलती है और बिहार में 200 वही पंजाब के मुकाबले बिहार के किसानों की कमाई 1/6 है। अगर बिहार सरकार किसानो की फसलों को समर्थन मूल्य पर खरीद जाए तो यहां के किसानों को हर साल 25 से 30 हजार करोड़ का मुनाफा होगा। उन्होंने बताया कि इस वक्त बिहार के किसानों के हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिहार में केवल 1% गेंहू और 13% धान समर्थन मूल्य पर बिक रहा है। पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण में बेतिया राज की जमीन पर लाखों लोगों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल रहा है। बिहार में करीब 57% लोग भूमिहीन है। बिहार के हर प्रखंड में साल में एक ऐसा स्कूल खुले जहां विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था हो

बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि,बिहार में समतामूलक शिक्षा व्यवस्था बनाने के चक्कर में शिक्षा का बेड़ागर्क कर दिया गया।शिक्षा के लिए जरूरी बिल्डिंग,शिक्षक और विद्यार्थियों का समायोजन नहीं है। स्कूल केवल खिचड़ी बांटने का सेंटर है। शैक्षणिक माहौल जो स्कूलों में होना चाहिए वो नहीं है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए हर प्रखंड में एक सेंटर ऑफ एक्सेलेंस होने चाहिए।जहां नेतरहाट जैसी शिक्षा व्यवस्था हो। ऐसे 500 विद्यालय हर साल खोले जाएं। शिक्षा का जो बजट है उसका एक हिस्सा इस काम में खर्च होना चाहिए। इस तरह में अगले 5 साल में बिहार में 2500 से 3000 ऐसे स्कूल हो जाएंगे। हर व्यक्ति के घर के 10 किमी के भीतर एक ऐसा स्कूल होगा जहां विश्वस्तरीय पढ़ाई होगी।उन्होंने कहा कि पदयात्रा बिहार के हर पंचायत, गांव और नगर क्षेत्र के स्तर पर समस्याओं और समाधान का एक ब्लूप्रिंट बनाया जा रहा है, पदयात्रा खत्म होने के 3 महीने के भीतर हम इसे जारी करेंगे। साढ़े 8 हजार ग्राम पंचायत और 2 हजार नगर पंचायत की विकास की योजनाओं का खाका हम तैयार कर रहे हैं।बताते चले कि जन सुराज पदयात्रा आज रक्सौल के नोनियाडीह से चलकर महादेवा, सिरसियामाल, नकरदेई, बसतपुर भकूरइया, हरपुर, नेकपुर टोला, रामपुर, सिरिसियाकला, शेखवाटोला, औरैया, श्यामपुर, बेलवा, भवनरी होते रात्रि विश्राम के लिए आदापुर के भेडीहारी पहुंची।

हिन्दुस्थान समाचार/आनंद प्रकाश