मुगल शासन के अंतिम चरण की राजनैतिक को दिखाया गया नाटक 'सीढ़ियां' में
उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी की ओर से वहीं के प्रेक्षागृह में हुआ नाटक का मंचन लखनऊ, 24 नवम्बर (हि.स.
मुगल शासन के अंतिम चरण की राजनैतिक को दिखाया गया नाटक ‘सीढ़ियां‘ में


मुगल शासन के अंतिम चरण की राजनैतिक को दिखाया गया नाटक ‘सीढ़ियां‘ में


उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी की ओर से वहीं के प्रेक्षागृह में हुआ नाटक का मंचन

लखनऊ, 24 नवम्बर (हि.स.)। नाटक ‘सीढ़ियां‘ में मुगल शासन के अंतिम चरणों की राजनैतिक व सामाजिक ढलान को प्रभावी रूप से दर्शाया गया। नाटक का मंचन उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी की ओर से पहली बार आयोजित हो रहे ‘लेखक एक नाटक अनेक‘ नाट्य समारोह की चौथी शाम गुरुवार को हुआ।

गोमती नगर स्थित अकादमी परिसर में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत चल रहे नाट्य समारोह में पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा के लिखे नाटकों का मंचन किया जा रहा है। इस कड़ी में आया यानि गुरुवार को उनके चौथे नाटक की प्रस्तुति हुई।

नाटक का कथानक मुगल शासन के अंतिम कालखंड का है। उस समय मुगल साम्राज्य के बिखराव के कारण सामाजिक विघटन और गिरते सामाजिक मूल्यों को दर्शाया गया। नाटक में दिखाया गया कि मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीला के शासनकाल में एक आम आदमी, सलीम ढिंढोरची अपनी चालबाजी से दिल्ली का सूबेदार बन जाता है। उस कालखंड में सत्य पर असत्य, प्रेम पर वासना और करुणा पर हिंसा की जीत को दर्शाया गया।

मंच पर सलीम का किरदार मानव गुप्ता, बनो का ईवा सिद्धिकी ने अभिनीत किया। उधमबाई व कुदेसिया बेगम का किरदार सरिता चतुर्वेदी ने, मोहम्मद शाह रंगीला का भूपेश जोशी, खालू का नीरज सिंह, बब्बन का विनायक, छक्कन का रचित, ने भूमिका की। नृत्यांगना दल में सिमरन शोभा, अरोरा, रुचिका अरोरा, नेहा, जिनाब शामिल रहीं। प्रसून नारायण के संगीत प्रभाव, राघव प्रकाश की प्रकाश परिकल्पना, रुचिका अरोरा और शोभा अरोरा की नृत्य संरचना, मोनिका की मुख्य सज्जा, डालचन्द्र की वेशभूषा परिकल्पना, कार्तिकेय अमित और बिलाल की वस्त्र सहायक की भूमिका ने नाटक के आकर्षण को बढ़ाया।

समारोह में अंतिम दिन शुक्रवार को दिल्ली की संस्कार भारती की ओर से दया प्रकाश सिन्हा के निर्देशन में नाटक “रक्त अभिषेक” का मंचन किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार/शैलेंद्र


 rajesh pande