मोदी और बाइडेन के बीच मुलाकात के बारे में विदेश मंत्रालय ने दिया स्पष्टीकरण
नई दिल्ली, 24 नवंबर (हि.स.)। विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति ज
मोदी और बाइडेन के बीच मुलाकात के बारे में विदेश मंत्रालय ने दिया स्पष्टीकरण


नई दिल्ली, 24 नवंबर (हि.स.)। विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच इंडोनेशिया के बाली में हुई मुलाकातों और बातचीत के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इस संबंध में भ्रामक रिपोर्टों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में कहा कि बाली में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति बाइडेन से कई बार मिले थे तथा इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के साथ त्रिपक्षीय वार्ता में भी हुई थी।

उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस संबंध में एक ट्वीट में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ प्रौद्योगिकी क्षेत्रीय और विश्व मामलों पर व्यापक विचार विमर्श किया था। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने कहा था कि दोनों नेताओं के बीच छोटी मुलाकात हुई और उन्होंने एक-दूसरे का अभिवादन किया। किसी विशेष मुद्दे पर बातचीत नहीं हुई। इन दोनों कथनों में अंतर को लेकर कूटनीतिक हलकों में टिप्पणियां की जा रही थी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विचार-विमर्श के संदर्भ में हमारे ओर से जो कहा गया वह सभी मुलाकातों और त्रिपक्षीय वार्ता के संदर्भ में था। इस संबंध में भ्रामक रिपोर्टों को कोई महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।

प्रवक्ता ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इस वर्ष अमेरिका जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है।

गुजरात दंगों के संदर्भ में अमेरिका की एक अदालत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को रोकने के लिए उन्हें दी गई छूट पर भी प्रवक्ता से एक सवाल पूछा गया। उनका ध्यान अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के इस कथन की ओर दिलाया गया कि सऊदी अरब के शासक मोहम्मद बिन सलमान को अमेरिका में कानूनी प्रक्रिया से छूट पूर्व में मोदी और कुछ अन्य नेताओं की दी गई रियायत जैसी ही है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिकी अधिकारी के कथन की सीधी आलोचना नहीं की लेकिन पूछा कि क्या यह टिप्पणी प्रासांगिक और आवश्यक थी? अथवा यह संदर्भ के रूप में की गई थी।

विदेश मंत्रालय ने भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों के बारे में अमेरिकी संसद की एक संस्था की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि यह गलत और दुराग्रह से ग्रस्त है। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी संसद कांग्रेस की ओर से गठित अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकार की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह रिपोर्ट गलत जानकारी पर आधारित है। लेकिन इससे हमें कोई आश्चर्य नहीं हुआ है। अमेरिकी संस्था का यह पुराना रवैया है जो भारत में संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों और प्रक्रिया की अज्ञानता का परिणाम है। प्रवक्ता ने रिपोर्ट को पूर्वाग्रह पूर्ण और गलत उद्देश्य से प्रेरित है। इस तरह की रिपोर्ट से अमेरिकी आयोग की साख और धक्का लगता है।

हिन्दुस्थान समाचार/अनूप/सुफल


 rajesh pande