मोरबी ब्रिज हादसा : मृतकों के परिजनों को 4 लाख मुआवजा नाकाफी, 10 लाख दें : हाई कोर्ट
- हाई कोर्ट में स्वत: संज्ञान पर हो रही सुनवाई - राज्य के सभी ब्रिजों का सर्वे कराने का सरकार को आदे
मोरबी ब्रिज हादसा : मृतकों के परिजनों को 4 लाख मुआवजा नाकाफी, 10 लाख दें : हाई कोर्ट


- हाई कोर्ट में स्वत: संज्ञान पर हो रही सुनवाई

- राज्य के सभी ब्रिजों का सर्वे कराने का सरकार को आदेश

अहमदाबाद, 24 नवंबर (हि.स.)। मोरबी में 30 अक्टूबर को हुए झूलता ब्रिज हादसे की सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता नाकाफी बताया है। हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई थी। स्वत: संज्ञान लेकर डे टू डे सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट ने गुरुवार को मृतकों के परिजनों को सरकार की ओर से मुआवजा राशि पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि परिजनों को दी जाने वाली 4 लाख रुपये की राशि पर्याप्त नहीं है। हादसे में 30 से 40 वर्ष के कई लोगों की जान गई है। हो सकता है कि इनमें कई घर में इकलौता कमाई करने वाला हो। हाई कोर्ट ने प्राथमिक तौर पर कहा कि सरकार को कम से कम 10 लाख रुपये मुआवजा प्रदान करना चाहिए।

हाई कोर्ट ने सवाल किया कि मृतकों की जाति लिखने की क्या जरूरत थी। सभी मृतकों को समान रूप से मानना चाहिए। जिन बच्चों के माता और पिता दोनों गुजर गए हों, उन बालकों को प्रति महीने 3 हजार रुपये मुआवजा चुकाए जाने की बात पर कोर्ट ने कहा कि 3000 रुपये में बच्चों के स्कूल यूनिफार्म और पुस्तक नहीं आएंगे। यह मुआवजा भी पर्याप्त नहीं है। दूसरी ओर सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने कहा कि मोरबी राजघराना परिवार से सभी मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये दिए गए हैं। माता-पिता खोने वाले बच्चों की संख्या 7 है। इन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष, प्रधानमंत्री राहत कोष और निजी दाताओं की ओर से मिले दान मिलाकर प्रत्येक बालक को 37 लाख रुपये चुकाए जाएंगे। इसमें अदाणी फाउंडेशन की ओर से प्रति बालक 25 लाख रुपये दिए जाएंगे।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सरकार को कहा कि राज्य के सभी ब्रिजों का सर्वे किया जाए और इनके यूज के लिए फिटनेश सर्टिफिकेट कोर्ट में पेश किया जाए। जो ब्रिज मरम्मत योग्य हैं, उनका तत्काल मरम्मत कार्य पूरा किया जाए। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी घायल को बड़े अस्पताल में दाखिल करने की जरूरत हो तो यह भी शीघ्र किया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार/ बिनोद पांडेय


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